येल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने लहसुन में ऐसा प्राकृतिक यौगिक पाया है जो मच्छरों और कई प्रकार की मक्खियों में यौन संचार और अंडा देने को कम कर देता है। टीम ने पाया कि यह असर लहसुन की तेज महक के कारण नहीं है, बल्कि कीटों के स्वाद के कारण होता है।
शोध बताता है कि कीटों के छोटे स्वाद अंगों में स्थित एक विशिष्ट स्वाद ग्रहक उस यौगिक पर प्रतिक्रिया देता है और सामान्य मेलजोल व्यवहार अवरुद्ध हो जाता है। यह खोज पहले फल मक्खियों के अध्ययन से शुरू हुई और फिर अन्य प्रजातियों तक बढ़ी।
लेखकों ने अपनी खोजों को 'फाइटोस्क्रीन' कहा है, जो पेड़ों और पौधों में ऐसे रसायन खोजने का तरीका है जो कीटों का व्यवहार बदल दें। वे कहते हैं कि यह पर्यावरण‑अनुकूल और सस्ता कीट नियंत्रण संभव कर सकता है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह कितनी जल्दी व्यावहारिक उपकरण बन पाएगा।
कठिन शब्द
- यौगिक — एक रासायनिक पदार्थ का अलग घटक
- स्वाद ग्रहक — जीव का वह अंग जो चखने की सूचना भेजे
- मेलजोल — जानवरों या लोगों का आपस में मिलना‑जुलना
- अवरुद्ध — किसी क्रिया या प्रक्रिया का रोक दिया जाना
- फाइटोस्क्रीन — पेड़‑पौधों से व्यवहार बदलने वाले रसायन खोजने का तरीका
- कीट नियंत्रण — हानिकारक छोटे जानवरों को कम करने की क्रिया
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चर्चा के प्रश्न
- अगर फाइटोस्क्रीन पर आधारित कीट नियंत्रण सस्ता और पर्यावरण‑अनुकूल बन जाए तो आप क्या उम्मीद करेंगे कि इसका उपयोग कैसे किया जाए?
- क्या आपको लगेगा कि पौधों से मिलने वाले रसायन लोगों या अन्य उपयोगी जानवरों पर असर कर सकते हैं? क्यों या क्यों नहीं?
- एक प्रजाति (जैसे फल मक्खी) में मिली खोज को अन्य प्रजातियों पर लागू करते समय कौन‑सी चुनौतियाँ आ सकती हैं?
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