न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU) के गणितज्ञों ने बताया है कि पक्षियों के झुंड और मछलियों के समूह किस तरह साथ-साथ गति करते हैं। यह नया काम पत्रिका Physical Review Fluids में प्रकाशित हुआ है और NYU के Applied Mathematics Laboratory के पहले के निष्कर्षों पर आधारित है।
शोध दल ने एक गणितीय मॉडल प्रस्तावित किया जो समूहों को नरम क्रिस्टल की तरह देखता है। मॉडल में व्यक्तिगत जानवर जाली जैसी व्यवस्था में होते हैं और लगभग समान दूरी बनाए रखते हैं; वे लचीले बंधों की तरह व्यवहार करते हैं। ऐसे निर्माण नाजुक होते हैं और हवा या पानी के बहाव तथा पास के वस्तुओं या शिकारी पर संवेदनशील प्रतिक्रिया देते हैं।
टीम ने पुराने प्रयोगों की समीक्षा की, जिनमें 3D-प्रिंट किए प्लास्टिक पंख वाले फ्लैपर्स को पानी में मोटरों से चलाया गया था। नकली झुंड ने अलग-अलग गति पर व्यवहार किया और मॉडल की भविष्यवाणियाँ मिल गईं। शोध के लेखक बताते हैं कि ये अंतर्दृष्टियाँ एयरस्पेस और ऑटोमोटिव अभियांत्रिकी, रोबोटिक्स और ऊर्जा संचयन के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। शोध दल में Jiajie Wu भी थे और कार्य ने नेशनल साइंस फाउंडेशन के अनुदान से समर्थन पाया।
कठिन शब्द
- गणितज्ञ — गणित का अध्ययन करने वाला व्यक्तिगणितज्ञों
- झुंड — एक साथ रहने या चलने वाले जानवरों का समूह
- मॉडल — वास्तविक चीज का सरल गणितीय रूप
- नाजुक — आसानी से टूटने या बदलने वाला
- संवेदनशील — बाहरी प्रभावों पर जल्दी प्रतिक्रिया करने वाला
- भविष्यवाणी — आने वाली घटनाओं के बारे में अनुमानभविष्यवाणियाँ
- अभियांत्रिकी — तकनीकी रचना और निर्माण का क्षेत्र
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चर्चा के प्रश्न
- इस तरह जानवरों के समूहों के व्यवहार के अध्ययन से रोज़मर्रा जीवन में कौन-कौन से उपयोग सोचते हैं? कारण बताइए।
- आपने कभी किसी जानवर या इंसानी समूह में नाजुक व्यवस्था देखी है जो बाहरी चीजों पर संवेदनशील हो? उदाहरण दें।
- अगर आप रोबोटिक झुंड बनाते तो किस तरह की सावधानियाँ या डिजाइन आप शामिल करते? संक्षेप में बताइए।