रीढ़ की हड्डी की चोटें अक्सर दीर्घकालिक विकलांगता देती हैं क्योंकि नर्व कोशिकाएँ ठीक तरह से नहीं बन पातीं। ETH Zurich के शोधकर्ताओं ने NPCbot नामक बायोहाइब्रिड माइक्रोरोबोट बनाया जो स्टेम कोशिकाओं को चुंबकीय नैनोकणों से जोड़ता है। नैनोकणों की दो परतें होती हैं: अंदर चुंबकीय परत और बाहर वाली परत विद्युत संकेत बनाती है।
बोट बनाने की प्रक्रिया तेज़ है और lab-on-chip सिस्टम से मात्रा बढ़ाई जा सकती है। टीम ने NPCbots को स्पाइनल कॉर्ड चोट वाली zebrafish larvae और कट रीढ़ वाली चूहों पर परखा। मछलियों ने तीन दिन में बेहतर तैरने का व्यवहार दिखाया और चूहों में 28 दिन बाद तंत्रिका कनेक्शन और चलने में सुधार मिला। अभी मानव परीक्षण से पहले और शोध जरूरी है।
कठिन शब्द
- विकलांगता — लम्बे समय तक रहने वाली शारीरिक या मानसिक कमी
- कोशिका — जीवों की छोटी सबसे मूल इकाईनर्व कोशिकाएँ, स्टेम कोशिकाओं
- नैनोकण — बहुत छोटे कण जो अत्यंत सूक्ष्म होते हैंचुंबकीय नैनोकणों, नैनोकणों की
- परत — किसी सतह पर लगी एक पतली तहदो परतें, चुंबकीय परत, बाहर वाली परत
- माइक्रोरोबोट — बहुत छोटे रोबोट जो जीव और मशीन मिलातेबायोहाइब्रिड माइक्रोरोबोट
- तंत्रिका — शरीर में संदेश भेजने वाली विशेष कोशिकातंत्रिका कनेक्शन
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चर्चा के प्रश्न
- यदि यह तकनीक सफल हो जाए तो इससे किस तरह मदद मिल सकती है?
- आपके हिसाब से और शोध क्यों जरूरी है? संक्षेप में बताइए।