नया अध्ययन संकेत देता है कि भारत में प्री-मान्सून महीनों के दौरान और विशेषकर हीटवेव के समय सतह-स्तर का ट्रोपोस्फेरिक ओज़ोन बढ़ रहा है और यह स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा रहा है। यह शोध Nature पत्रिका npj Clean Air में प्रकाशित हुआ है और 2004–2024 के मार्च–जून के लिए सतह मापन, उपग्रह अवलोकन और रीएनेलिसिस डेटा का उपयोग करता है।
अध्ययन में 2004–2024 के बीच सात क्षेत्रों में कुल 188 हीटवेव घटनाएँ दर्ज हुईं जिनमें सतह ओज़ोन ने WHO की सुरक्षित सीमा 70 माइक्रोग्राम/घन मीटर को पार किया। उत्तरी भारत में सांद्रताएँ 85–110 माइक्रोग्राम/घन मीटर तक मापी गईं। हाल की हीटवेव अप्रैल में शुरू हुई और मई में अधिकतम तापमान 47°C से ऊपर पहुंच गया।
शोध से अनुमानित स्वास्थ्य प्रभावों में 2024 के हीटवेव के दौरान COPD से 15,615 और इस्कीमिक हृदय रोग से 10,898 मौतें शामिल हैं; यह आंकड़ा हीटवेव से पहले के 15,125 और 10,556 की तुलना में लगभग 3.2% वृद्धि दर्शाता है। State of Global Air 2025 रिपोर्ट कहती है कि ओज़ोन एक्सपोज़र दिल और फेफड़ों से होने वाली मौतों में महत्वपूर्ण योगदान देता है और ओज़ोन प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले देशों में भारत तीसरे स्थान पर है।
रिपोर्ट और अध्ययन दोनों ओज़ोन प्रीकर्सर गैसों, तेज धूप और बढ़ते तापमान को भारत की संवेदनशीलता का कारण बताते हैं। मुख्य प्रीकर्सर में नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, वोलैटाइल ऑर्गेनिक कंपाउन्ड्स, कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन शामिल हैं। स्रोतों में जीवाश्म ईंधन जलाना, औद्योगिक गतिविधि, वाहनों का उत्सर्जन तथा पेड़-पौधों की प्राकृतिक क्रियाएँ हैं। पट्टिकीय स्तर पर ओज़ोन तब बनता है जब धूप नाइट्रोजन डायऑक्साइड और VOCs की उपस्थिति में रासायनिक प्रतिक्रियाएँ तेज कर देती है और O3 बनता है।
अध्ययन के विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि नीतिगत प्रतिक्रिया में जलवायु अनुकूलन, हीट-एक्शन योजनाएँ और ओज़ोन प्रीकर्सर उत्सर्जन पर नियंत्रण एक साथ होने चाहिए। वे चेतावनी देते हैं कि वास्तविक स्वास्थ्य बोझ आवास, कार्यस्थल में एक्सपोज़र, कूलिंग तक पहुँच, स्वास्थ्य सेवाएँ और निर्मित पर्यावरण जैसे पूरक कारकों से और जटिल हो सकता है। उपमहाद्वीप ने 2000 के बाद तीव्र तापमान वृद्धि देखी है, इसलिए लोगों, नीति और योजना पर निरंतर निवेश आवश्यक है।
कठिन शब्द
- ओज़ोन — हवा में मौजूद एक ऑक्सीजन युक्त गैसट्रोपोस्फेरिक ओज़ोन, ओज़ोन एक्सपोज़र
- सांद्रता — हवा में किसी पदार्थ की मात्रा या घनत्वसांद्रताएँ
- रीएनेलिसिस — पुराने मौसम डेटा का संयोजित विश्लेषण
- प्रीकर्सर — ऐसी गैसें जो दूसरे प्रदूषक बनाती हैंप्रीकर्सर गैसों
- उत्सर्जन — हवा में गैस या कण छोड़ने की क्रिया
- स्वास्थ्य बोझ — रोग और मृत्यु से होने वाला कुल नकारात्मक प्रभाव
- एक्सपोज़र — किसी हानिकारक तत्व के संपर्क में आने की स्थिति
- हीटवेव — अत्यधिक और लंबी अवधि की असामान्य गर्मी की घटनाहीटवेव के दौरान
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चर्चा के प्रश्न
- ओज़ोन प्रीकर्सर उत्सर्जन पर नियंत्रण लागू करने में भारत को कौन-कौन सी व्यवहारिक और तकनीकी चुनौतियाँ आ सकती हैं? कारण बताइए।
- हीट-एक्शन योजनाएँ तथा कूलिंग तक पहुँच में निवेश स्थानीय स्वास्थ्य जोखिमों को किस तरह कम कर सकते हैं? अपने विचार और उदाहरण दीजिए।
- लेख में बताए गए पूरक कारक (आवास, कार्यस्थल एक्सपोज़र, कूलिंग तक पहुँच आदि) वास्तविक स्वास्थ्य बोझ को कैसे जटिल बना सकते हैं? कुछ उदाहरण बताइए।