तिलापिया कई देशों में एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत है। नाइल तिलापिया खासकर 26 और 30 डिग्री सेल्सियस के बीच के पानी में अच्छी तरह बढ़ती है। पानी ठंडा होने पर वृद्धि धीमी होती है और किसान ठंडे महीनों में छोटी मछलियाँ पाते हैं।
मिस्र और फिलीपींस के शोधकर्ताओं ने लेसिथिन और अरबी गम को आहार अनुपूरक के रूप में परखा। उन्होंने पाया कि इन घटकों से ठंड के तनाव पर मछलियों के चयापचय, एंजाइम स्तर और खनिज संतुलन बेहतर हुए। परिणामों में वृद्धि और बचने की दर में सुधार दिखा।
लेसिथिन अंडे की जर्दी और सोयाबीन में मिलता है और अरबी गम पेड़ों के राल से आती है। शोधकर्ता सोचते हैं कि ये घटक कोशिका झिल्ली के व्यवहार को बदलते हैं, जिससे मछलियाँ ठंड के लिए अनुकूल हो सकती हैं।
कठिन शब्द
- अनुपूरक — खाद्य में छोटी मात्रा दिया जाने वाला पदार्थ
- चयापचय — जीव के अंदर ऊर्जा और पदार्थ का परिवर्तन
- एंजाइम — शरीर में रासायनिक क्रिया तेज करने वाला प्रोटीन
- खनिज संतुलन — शरीर में खनिजों की सही मात्रा और बराबरी
- कोशिका झिल्ली — कोशिका के बाहर और भीतर की सीमा
- बचने की दर — किसी समय पर जीवित रहने वाले का अनुपात
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चर्चा के प्रश्न
- ठंड के महीनों में मछलियाँ छोटी क्यों रहती हैं?
- ठंड से बचने के लिए मछलीपालक क्या कदम उठा सकते हैं?
- लेसिथिन और अरबी गम मछलियों की मदद कैसे कर सकते हैं, संक्षेप में बताइए।