अदालतों में AI और डिजिटल सुधारCEFR B2
5 दिस॰ 2025
आधारित: Sakkcham Singh Parmaar, Global Voices • CC BY 3.0
फोटो: Rishu Bhosale, Unsplash
भारत की अदालतें कई करोड़ मामलों के बोझ से जूझ रही हैं और प्रशासनिक सुधार के रूप में डिजिटलीकरण और AI की ओर बढ़ रही हैं। e-Courts कार्यक्रम 2007 में शुरू हुआ और Phase III अब मशीन लर्निंग तथा भाषा तकनीकों को डिजिटाइज़्ड न्यायिक जानकारी पर लागू करने पर केंद्रित है। सरकार और सुप्रीम कोर्ट विभिन्न तकनीकों में निवेश कर अदालतों के आधुनिकीकरण का लक्ष्य रखते हैं।
SUPACE (Supreme Court Portal for Assistance in Courts Efficiency) एक ऐसा औजार है जो न्यायाधीशों और शोध कर्मचारियों को तथ्य पहचानने, सप्रसंग मिसालें सुझाने और मसौदा रूपरेखा तैयार करने में सहयोग देता है, लेकिन निर्णायक भूमिका नहीं निभाता। सुप्रीम कोर्ट ने Vidhik Anuvaad Software (SUVAS) विकसित किया है ताकि अंग्रेजी निर्णयों का अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जा सके, और 2023 से स्वचालित ट्रांसक्रिप्शन संविधान मामलों में लगभग रीयल-टाइम, खोजयोग्य टेक्स्ट उपलब्ध करा रहा है।
केरल उच्च न्यायालय ने 1 नवंबर 2025 से अधीनस्थ अदालतों में गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने के लिए AI-सक्षम स्पीच-टू-टेक्स्ट टूल Adalat.AI के उपयोग का आदेश दिया; Adalat.AI एक स्टार्ट-अप ने विकसित किया है जिसकी अनुसंधान संबंध Harvard और MIT से हैं। आदेश में वैकल्पिक प्लेटफार्मों के परीक्षण के लिए हाई कोर्ट के IT निदेशालय द्वारा अनुमोदन का प्रावधान भी रखा गया है।
विशेषज्ञ और अधिकारी मानते हैं कि AI त्रुटियाँ कम कर सकता है, ई-फाइलिंग की सामान्य गलतियाँ पकड़ सकता है, सुनवाईयाँ छोटा कर सकता है और दूरदराज जिलों में न्याय तक पहुंच बेहतर कर सकता है। पर चिंताएँ भी मौजूद हैं: Delhi हाई कोर्ट ने 2023 में ChatGPT-आधारित दलीलों को खारिज किया और कुछ दायर दस्तावेज़ों में काल्पनिक मामले तथा गलत उद्धरण पाए गए। मॉडल की अपारदर्शिता और प्रशिक्षण डेटा में जाति, लिंग, वर्ग या धर्म से जुड़ा पक्षपात एक बड़ा जोखिम है, और संवेदनशील न्यायिक रिकॉर्ड सार्वजनिक क्लाउड टूल में अपलोड करने की सलाह नहीं दी जाती। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 स्वचालित प्रसंस्करण पर लागू होता है।
- नीतियाँ: केरल की AI नीति AI को प्रशासनिक उपकरण मानती है।
- जनरेटिव AI को निर्णय लिखने से रोका गया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने एक AI कमेटी बनाई है और IIT Madras के साथ काम कर रहा है।
- विशेषज्ञों ने पक्षपात ऑडिट, खुलासे, प्रशिक्षण और चुनौती के रास्ते सुझाए हैं।
कठिन शब्द
- डिजिटलीकरण — कागज़ी जानकारी को इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलने की प्रक्रिया
- मशीन लर्निंग — कम्प्यूटर से डेटा से सीखने की तकनीक
- आधुनिकीकरण — प्रणाली या संस्था को नया बनाना
- स्पीच-टू-टेक्स्ट — बोलकर दिए शब्दों को लिखित पाठ में बदलने वाला उपकरण
- अपारदर्शिता — किसी सिस्टम के काम करने के तरीके का अस्पष्ट होना
- पक्षपात — किसी समूह के प्रति असमान या अन्यायपूर्ण रवैया
- संवेदनशील — ऐसा जो निजी या गुप्त जानकारी रखता हो
- अनुमोदन — किसी प्रस्ताव या व्यवस्था को स्वीकार करना
- जनरेटिव — नए टेक्स्ट या सामग्री स्वतः बनाने वाली तकनीक
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- लेख में बताए गए लाभों और चिंताओं को ध्यान में रखकर आप बताइए कि अदालतों में AI के किस उपयोग पर सबसे पहले ध्यान दिया जाना चाहिए और क्यों?
- केरल हाई कोर्ट का Adalat.AI के इस्तेमाल और वैकल्पिक प्लेटफार्मों के परीक्षण का प्रावधान क्या यह न्याय तक पहुंच बेहतर करेगा? अपने कारणों के साथ समझाइए।
- आपके विचार में संवेदनशील न्यायिक रिकॉर्ड सार्वजनिक क्लाउड टूल में न डालने की सलाह का क्या महत्व है? किस तरह की सुरक्षा आवश्यक होगी?