एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह दिखाया कि समुद्री नमूनों में मौजूद सूक्ष्मप्लास्टिक से निकला कार्बन पारंपरिक जैविक कार्बन मापों के समान परिणाम दे सकता है। इस निष्कर्ष को PLOS One जर्नल में प्रकाशित पेपर में बताया गया है।
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पानी और तलछट के नमूनों में कार्बन मापने वाले विश्लेषणात्मक उपकरणों का उपयोग किया और फिर सूक्ष्मप्लास्टिक संदूषक तथा तलछटी कार्बन दोनों से निकलने वाले कार्बन की मात्रा की गणना की। उन्होंने पाया कि उपकरण जीवित या कभी जीवित रहे जैविक स्रोत और प्लास्टिक स्रोत के कार्बन के बीच भेद नहीं कर पाते।
लेखक यह चेतावनी देते हैं कि सूक्ष्मप्लास्टिक की उपस्थिति लंबे समय में महासागरीय कार्बन मापों को धीरे-धीरे विकृत कर सकती है और उन मॉडल्स को प्रभावित कर सकती है जिनसे वैज्ञानिक जलवायु-संबंधी बदलावों की भविष्यवाणी करते हैं। अध्ययन में नमूनों में आने वाले प्लास्टिक के साधारण स्रोतों—जैसे कपड़ों से सूक्ष्मफाइबर और सैंपलिंग उपकरण—का भी उल्लेख है।
कठिन शब्द
- सूक्ष्मप्लास्टिक — बहुत छोटे प्लास्टिक के कण
- तलछट — समुद्र या नदी के नीचे जमा मिट्टी और कण
- विश्लेषणात्मक — जाँच करने से जुड़ा, परीक्षण के लिए उपयोगी
- संदूषक — पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाला पदार्थ
- विकृत — सही आकार या अर्थ बदल देना
- भविष्यवाणी — आने वाले समय के बारे में अनुमान लगाना
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चर्चा के प्रश्न
- यह खोज महासागरीय कार्बन मापों और जलवायु मॉडल पर किस तरह असर डाल सकती है? अपने विचार लिखिए।
- नमूनों में आने वाले प्लास्टिक स्रोत — जैसे कपड़ों से सूक्ष्मफाइबर — को देखते हुए आप घर पर कौन से छोटे कदम सुझाएँगे?