पाकिस्तान: अदालतें और पर्यावरणीय अधिकारCEFR B1
11 जन॰ 2026
आधारित: Mariam Waqar Khattak, Global Voices • CC BY 3.0
फोटो: Salsabeel Ehsan, Unsplash
पाकिस्तान की न्याय प्रणाली में Shehla Zia और Asghar Leghari जैसे फैसलों ने Article 9 की व्याख्या कर के पर्यावरण संरक्षण को संवैधानिक मान्यता दी है। मई 2025 में पेशावर उच्च न्यायालय की अब्बोटाबाद बेंच ने संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थिक तंत्रों की रक्षा में सरकार और Environmental Protection Agency की विफलताओं के लिए जिम्मेदारी ठहराई। संसद ने Article 9A को 26th Constitutional Amendment के जरिए कानूनी रूप दिया।
फिर भी कई बाधाएँ मौजूद हैं। अक्टूबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्ट कहती है कि वैश्विक जलवायु मुकदमों को संरचनात्मक, प्रक्रियात्मक और वित्तीय अवरोध मिलते हैं और वे मजबूत नागरिक समाज, PIL की संस्कृति और विशेषज्ञ कानूनी ज्ञान पर निर्भर रहते हैं। पाकिस्तान में ये सहायक तंत्र कमजोर हैं।
व्यक्तिगत मामलों से यह साफ है। Muhammad ने दशक भर से अवैध वनों की कटाई के खिलाफ याचिका रखी है और स्थानीय NGO पर निर्भर है क्योंकि मुकदमेबाजी लागत बहुत अधिक है। Advocate Abira Ashfaq कहती हैं कि NGO फंडिंग में गिरावट और PIL के लिए लगातार समर्थन का अभाव होने से कम पर्यावरणीय दावे Environmental Tribunals तक पहुँचते हैं। सुधारों के लिए वित्तीय और संस्थागत बाधाओं को हटाना तथा न्यायपालिका में कानूनी और वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।
कठिन शब्द
- पर्यावरण संरक्षण — प्रकृति और संसाधनों की रक्षा करने की क्रिया
- व्याख्या — किसी बात का अर्थ या मतलब बताना
- संवैधानिक — संविधान से संबंधित या उसे मानने वाला
- अवरोध — किसी काम या प्रक्रिया में रुकावट या बाधा
- न्यायपालिका — कानून लागू करने और फैसले देने वाली संस्था
- याचिका — किसी शिकायत या अनुरोध के लिए लिखा हुआ पत्र
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चर्चा के प्रश्न
- पाकिस्तान के उदाहरण से आप क्या समझते हैं कि अदालतें पर्यावरण संरक्षण में कैसे मदद कर सकती हैं?
- यदि NGO फंडिंग कम हो जाए तो इससे स्थानीय लोगों और पर्यावरण कानूनों पर क्या असर होगा?
- न्यायपालिका में कानूनी और वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाने के लिए आप कौन से साधारण कदम सुझाएँगे?
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