OECD की नवीनतम रिपोर्ट सूखों के आर्थिक प्रभावों को लेकर गंभीर चेतावनी देती है। जलवायु परिवर्तन के कारण सूखों की आवृत्ति में वृद्धि हुई है, जिससे कृषि और अन्य क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सूखों के कारण एक देश का कुल घरेलू उत्पाद (GDP) 0.1% से 1% तक प्रभावित हो सकता है।
संभावित समाधान के लिए, OECD ने तीन मुख्य रणनीतियाँ सुझाई हैं। इनमें सिंचाई दक्षता में सुधार, जल मूल्य निर्धारण और जल प्रबंधन में सुधार शामिल हैं। रिपोर्ट का कहना है कि प्राकृतिक विधियों और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके सूखों के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
हालांकि, उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों में जलवायु के अनुकूल होने की क्षमता सीमित है। ऐसे में इन क्षेत्रों में जल प्रबंधन में सुधार करने की आवश्यकता है। इससे लोगों को अधिक जल और फ़सल उत्पादन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
कठिन शब्द
- सूखा — लंबे समय तक बारिश न होनासूखों
- आवृत्ति — किसी घटना के होने की बारंबारता
- प्रभाव — किसी चीज़ के परिणाम या असरप्रभावों
- घरेलू उत्पाद — देश के अंदर बनी वस्तुओं व सेवाओं का मूल्य
- सिंचाई — फसल को पानी पहुँचाने की व्यवस्था या प्रक्रिया
- जल प्रबंधन — जल के स्रोतों का उपयोग और संरक्षण करने की नीति
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चर्चा के प्रश्न
- जल प्रबंधन में सुधार करने से स्थानीय लोगों की रोज़मर्रा ज़िन्दगी पर क्या असर पड़ सकता है? कारण बताइए।
- वे कौन से बाधाएँ हो सकती हैं जो उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में जल प्रबंधन सुधारने में रोढ़ी बनें? उदाहरण दीजिए।
- प्राकृतिक विधियों और आधुनिक तकनीकों के उपयोग में संतुलन बनाने के फायदे और जोखिम क्या हो सकते हैं?