किर्गिज़स्तान में चीन का बढ़ता प्रभाव और स्थानीय विरोधCEFR B2
20 नव॰ 2025
आधारित: Nurbek Bekmurzaev, Global Voices • CC BY 3.0
फोटो: Annie Spratt, Unsplash
हाल के वर्षों में चीन किर्गिज़स्तान का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार बन गया है। वह अब देश का मुख्य ऋणदाता, सबसे बड़ा निवेशक और सबसे बड़ा व्यापारिक गठजोड़कर्ता है। 2023 में द्विपक्षीय संबंध समग्र सामरिक साझेदारी के रूप में उन्नत हुए और सहयोग खनन, कृषि, ऊर्जा, परिवहन और अन्य क्षेत्रों में विस्तृत हुआ।
इस विस्तार ने व्यापक स्थानीय प्रतिरोध जन्म दिया। विरोध प्रदर्शन, हिंसक टकराव, व्यापारिक ठिकानों पर छापे और कथित ‘‘गैरकानूनी’’ प्रवासियों की पहचान व निर्वासन की मुहिमें सामने आईं। शोधकर्ता बताते हैं कि 2018–2021 के बीच विदेशियों पर केंद्रित प्रदर्शनों में दो-तिहाई से अधिक चीन पर केन्द्रित थे। सबसे तीव्र हिंसा अक्टूबर 2020 में हुई, जब विवादित चुनावों ने सत्ता शून्य पैदा किया और चीनी व्यवसायों पर हमले हुए; इसके बाद सरकार ने सीमा पर बनने वाले $280 million के लॉजिस्टिक्स टर्मिनल को रद्द कर दिया।
पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की शिकायतें विरोध का मुख्य कारण रहीं। तेल, गैस और खनन परियोजनाओं पर प्रदूषण, जहरीले रिसाव और जल व फसलों को नुकसान पहुँचाने के आरोप लगे। रिपोर्ट किए गए मामलों में करना‑बाल्टा के जुंडा रिफाइनरी पर उत्सर्जन जुर्माना और Zhong Ji द्वारा संचालित Solton‑Sary सोने की खान के पास पशुधन की मृत्यु शामिल हैं।
प्रवासन का डर और जमीन का नुकसान का भय भी महत्वपूर्ण रहा है: किर्गिज़स्तान में लगभग 9,000 चीनी कामगार हैं, जबकि अफवाहें 100,000 तक कहती हैं। चीन के पास किर्गिज़स्तान के विदेशी ऋण का एक-तिहाई से अधिक है, जिससे निर्भरता संबंधी चिंताएँ बढ़ती हैं।
राजनीतिक और सामाजिक जवाब में 2020 के बाद सरकार ने नागरिक समाज और मीडिया पर नियंत्रण कड़ा किया और मार्च 2022 से बिश्केक के केंद्रीय हिस्से में प्रदर्शन प्रतिबंधित हैं। Central Asia Barometer के सर्वे बताते हैं कि चीन के प्रति नकारात्मक राय 2020 में लगभग 50 प्रतिशत से घटकर आज केवल 25 प्रतिशत के थोड़े ऊपर रह गई है, हालांकि विशेषज्ञ इस गिरावट के कई कारण बताते हैं।
चीन ने प्रतिक्रिया स्वरूप सुरक्षा सहायता बढ़ाई, विदेशी निजी सुरक्षा कंपनियों को काम करने की अनुमति दी (कम से कम छह अब काम कर रही हैं) और Zhongjun Junhong Group को 2016 में आग्नेयास्त्र परमिट मिला था। साथ ही उसने तीन कन्फ्यूशियस संस्थान, छात्रवृत्तियाँ और व्यावसायिक लुबन कार्यशालाएँ लॉन्च कीं। बिश्केक की 2024 में खुली लुबन कार्यशाला जलविद्युत और सड़क निर्माण पर ध्यान देती है, जो प्रशिक्षण और उच्च-मूल्य निवेश के जरिए अपनी छवि सुधारने की ओर संकेत करती है।
कठिन शब्द
- साझेदार — अर्थव्यवस्था में सहयोग करने वाला दूसरा पक्ष
- ऋणदाता — किसी को पैसा उधार देने वाला संस्था या व्यक्ति
- गठजोड़कर्ता — दो या अधिक पक्षों को जोड़ने वाला संगठन
- समग्र — कुल मिलाकर सभी हिस्सों का एक साथ
- प्रतिरोध — किसी चीज़ का विरोध या रोका जाना
- प्रदूषण — प्राकृतिक वातावरण में हानिकारक पदार्थों का प्रवेश
- उत्सर्जन — वातावरण में छोड़ने वाली हानिकारक गैस या पदार्थ
- प्रवासन — लोगों का किसी जगह से दूसरी जगह जाना या बसना
- निर्भरता — किसी पर आर्थिक या अन्य रूप से आश्रित होना
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चर्चा के प्रश्न
- किर्गिज़स्तान की चीन पर निर्भरता के कौन‑कौन से संभावित आर्थिक और राजनीतिक नतीजे हो सकते हैं? अपने विचार उदाहरणों के साथ बताइए।
- स्थानीय पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंताओं के मद्देनजर बाहरी निवेश को कैसे संतुलित किया जा सकता है? सरकार या कंपनियाँ किन कदमों से भरोसा बढ़ा सकती हैं?
- चीन द्वारा छात्रवृत्तियाँ, सांस्कृतिक संस्थान और प्रशिक्षण वर्कशॉप शुरू करने का स्थानीय सार्वजनिक राय पर क्या प्रभाव हो सकता है? अपने तर्क दीजिए।