Tufts University की एक टीम ने सॉरडो स्टार्टर्स से माइक्रोबों को अलग कर उनके अकेले और जोड़ों में वृद्धि की दर मापी। शोध का उद्देश्य यह परखना था कि क्या सरल जोड़ीवार इंटरैक्शन से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कौन से माइक्रोब एक साथ सह-अस्तित्व बनाए रखेंगे। यह अध्ययन जर्नल Ecology में प्रकाशित हुआ।
टीम ने मापों से एक मॉडल बनाया और इसे अधिकप्रजाति समुदायों पर परखा, जहाँ प्रजातियाँ एक साथ प्लेट पर उगाईं गयीं। मॉडल ने भरोसेमंद तरीके से कई मिश्रणों में सह-अस्तित्व और सापेक्ष प्रचुरता बताई, पर नौ प्रजातियों में से केवल दो प्रजातियाँ मॉडल की भविष्यवाणी से अलग थीं।
वरिष्ठ लेखक लॉरेंस उरिकियो ने कहा कि जब मॉडल में आबादी के बार-बार घटने और फिर वृद्धि को शामिल नहीं किया गया, तो परिणाम कम अच्छे थे। सह-नेता कस्तुरी लेले बताती हैं कि धीमी बढ़ने वाली प्रजातियाँ बार-बार घटने की स्थितियों में तेज प्रजातियों को बाहर करने के लिए पर्याप्त प्रतिस्थापन नहीं कर पातीं।
कठिन शब्द
- माइक्रोब — बहुत छोटे सूक्ष्मजीव जिन्हें आँख से नहीं देखा जातामाइक्रोबों
- जोड़ीवार — दो इकाइयों या प्रजातियों के बीच की परस्पर क्रिया
- सह-अस्तित्व — एक साथ लंबे समय तक रहने की स्थिति
- सापेक्ष प्रचुरता — किसी प्रजाति की संख्या अन्यों के मुकाबले
- आबादी — किसी स्थान पर किसी प्रजाति की कुल संख्या
- प्रतिस्थापन — एक प्रजाति द्वारा दूसरे की जगह लेना
- मॉडल — वास्तविक तंत्र का सरल गणितीय चित्रण
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आप सोचते हैं कि जोड़ीवार इंटरैक्शन से सभी बहु-प्रजाति समुदायों का भविष्य समझा जा सकता है? क्यों?
- यदि आप इस प्रयोग को दोबारा करें तो आप कौन-सी चीज जोड़ना या बदलना चाहेंगे? बताइए।
- धीमी और तेज़ बढ़ने वाली प्रजातियों के बीच प्रतिस्थापन और सह-अस्तित्व को अपने शब्दों में कैसे समझाएँगे?