नाइट्रोजन उर्वरक फसलों की पैदावार बढ़ाते हैं, लेकिन पौधे केवल आधी खाद ही अवशोषित कर पाते हैं। बाकी बची खाद जल स्रोतों को प्रदूषित करती है और वातावरण को नुकसान पहुँचाती है। इसके अलावा, रासायनिक खाद बहुत महंगी होती है। इसलिए वैज्ञानिक लंबे समय से इस समस्या का समाधान खोज रहे हैं।
हाल ही में शोधकर्ताओं ने पौधों में HHO5 नामक एक प्रोटीन की पहचान की है। यह प्रोटीन पौधे को संकेत देता है कि उसने पर्याप्त नाइट्रोजन ले लिया है। अकेले काम करते हुए यह प्रोटीन पौधे को मिट्टी से और खाद लेने से रोकता है। इससे पौधे की ऊर्जा बचती है।
प्रयोगों में वैज्ञानिकों ने देखा कि इस प्रोटीन की कमी वाले पौधों ने तीन गुना अधिक नाइट्रोजन अवशोषित किया। वैज्ञानिक ऐसी फसलें बनाना चाहते हैं जो अधिक नाइट्रोजन सोख सकें। इससे किसानों की लागत और प्रदूषण दोनों कम होंगे।
कठिन शब्द
- शोधकर्ता — किसी विषय पर नई खोज करने वाला व्यक्ति।शोधकर्ताओं
- उर्वरक — फसल बढ़ाने के लिए मिट्टी में डाली जाने वाली खाद।
- पैदावार — खेतों से प्राप्त होने वाली कुल फसल की मात्रा।
- पर्याप्त — जितनी आवश्यकता हो उतना या काफी।
- संकेत — किसी बात को समझाने के लिए दिया गया इशारा।
- लागत — किसी वस्तु को बनाने या खरीदने में लगा धन।
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चर्चा के प्रश्न
- रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण को क्या नुकसान हो सकते हैं?
- ऐसी फसलें बनाने से किसानों को क्या लाभ हो सकते हैं जो अधिक नाइट्रोजन सोख सकें?