Sabar Bonda (2025) ग्रामीण भारत में क्वियर जीवन का एक शांत, सूक्ष्म चित्र प्रस्तुत करती है। निर्देशक और निर्माता Rohan ने अपनी निजी पृष्ठभूमि — मुंबई की एक झुग्गी से उठकर — और कल्पना मिलाकर यह कहानी बनाई है। कथा Anand नाम के कॉल‑सेंटर कर्मचारी के गाँव लौटने से शुरू होती है, जहाँ वह किसान Balya से फिर जुड़ता है और परिवार के विवाह दबाव के बीच दोनों के बीच अपनत्व का एक कोमल बँधन बनता है।
कानूनी और सार्वजनिक संदर्भ कहानी की व्याख्या के लिए महत्वपूर्ण हैं। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने Supriyo v. Union of India में मामले सुने; यूनियन ऑफ़ इंडिया ने क्वियरपन को "शहरी अभिजात" बताया, लेकिन कोर्ट ने इस आकलन से असहमत कहा। पूर्व मुख्य न्यायाधीश D.Y. Chandrachud ने अल्पमत में लिखा कि साहित्य और रिपोर्ट दिखाती हैं कि क्वियरता सिर्फ शहरों या अमीर लोगों तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने विवाह का पूर्ण अधिकार नहीं दिया, पर क्वियर जीवन की वास्तविकता स्वीकार की और सरकार से कानून पर विचार करने का कहा; अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह कानून में बदलाव विधायिका का क्षेत्र है। Supriyo के दो साल बाद कानूनी बदलाव बहुत कम हुए हैं, पर कुछ लोगों के अनुसार दैनिक जीवन में अनौपचारिक मान्यता बढ़ी है।
फ़िल्म भाषा और रूपक पर भी निर्भर रहती है: Sabar Bonda (Cactus Pears) में कैक्टस‑फल बाहर काँटेदार और भीतर मीठे के रूपक से क्वियरता की जटिलता दिखाई गई है। फिल्म मराठी में है और पारंपरिक आघात‑केंद्रित रूढ़ियों से दूर रहती है; Anand की माँ चुपचाप उनका समर्थन करती हैं और बाद में उनके साथ रहने की जगह बनाती हैं।
फ़िल्म को Sundance Film Festival में World Cinema Grand Jury Prize मिला। Film Critics Guild ने इसे 8.6/10 दिया और 19 September, 2025 को ट्वीट कर बताया कि फ़िल्म उसी दिन भारत के कुछ चुनिंदा थिएटरों में रिलीज़ हुई। आलोचकों ने फ़िल्म की धीमी, सावधान रफ्तार की प्रशंसा की; Anupama Chopra ने इसे "एक गीतात्मक, सुस्त आत्म‑खोज और अपनत्व की यात्रा" कहा और अन्य आलोचकों ने इसे "कुछ ताज़ा", "एक सुंदर और सरल फ़िल्म" और "एक शांत क्रांति" बताया।
- मुख्य विषय: ग्रामीण क्वियर जीवन और पारिवारिक समर्थन
- कानूनी संदर्भ: Supriyo वादी
- पुरस्कार और आलोचना: Sundance, 8.6/10
कठिन शब्द
- सूक्ष्म — बारीक और नाज़ुक तौर पर दिखने वाला
- अपनत्व — निकटता और हमदर्दी का भाव या संबंध
- व्याख्या — किसी बात के अर्थ को समझाना
- अल्पमत — विरोध करके अलग राय रखने की स्थिति
- विधायिका — कानून बनाने वाली सरकारी संस्था
- अनौपचारिक मान्यता — कानूनी रूप से नहीं पर व्यवहार में स्वीकार
- रूपक — किसी विचार को प्रतीक या उपमा से दिखाना
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- यह फ़िल्म ग्रामीण क्षेत्रों में क्वियर लोगों के अनुभवों के बारे में क्या संकेत देती है? उदाहरण और कारण बताइए।
- Supriyo के बाद कानूनी बदलाव कम हुए पर अनौपचारिक मान्यता बढ़ी — आप इस अंतर के कारण क्या सोचते हैं? अपने विचार लिखिए।
- फ़िल्म का कैक्टस‑फल रूपक और धीमी, सावधान रफ्तार कथा पर कैसे असर डालती है? अपने अनुभव या कल्पना से उदाहरण दीजिए।