खालिद खे़ला, मिस्र के स्वतंत्र फिल्ममेकरCEFR B2
10 जुल॰ 2025
आधारित: Fatma Al-Zahraa Badawy, Global Voices • CC BY 3.0
फोटो: Lisa Marie Theck, Unsplash
खालिद खे़ला एक स्वतंत्र मिस्रियन फिल्ममेकर हैं जिन्होंने अपनी पीढ़ी की छुपी जद्दोजहदों को दिखाने की पहचान बनाई है। वह 1992 में हेलवान के पास काहिरा के दक्षिण में पैदा हुए थे और शुरुआत में सोशल वीडियो बनाते रहे। बाद में उनके छोटे फ़िल्मी नाटक शहरी जीवन, कामना और सत्ता के रिश्तों की परख करते हैं।
उनकी तीन मिनट की छोटी फ़िल्म "Dunya wa Akhira" (जीवन और परलोक) ने उन्हें पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच दिया। यह फ़िल्म उस युवक की छोटी लेकिन तीव्र कहानी बताती है जो अपने चोरी हुए फोन का पीछा करने और मस्जिद की ई़क़ाम की आवाज़ पर जवाब देने के बीच फँसा होता है। इसी फ़िल्म को ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, इटली, नीदरलैंड और ग्रीस के फ़ेस्टिवलों में दिखाया गया, और यह खे़ला का मिस्र से बाहर पहला सफ़र साबित हुई।
उन्होंने "The Landlord" जैसी मनोवैज्ञानिक ड्रामा भी बनाई, जो एक छोटे अपार्टमेंट भवन में सत्ता द्वारा परेशान करने की समस्या पर केंद्रित है। खे़ला ने मकान मालिक को सादे खलनायक के रूप में पेश करने की बजाय जटिल चित्र देने की कोशिश की और अभिनेत्री हागर एल सर्राग के साथ मिलकर घर की सुरक्षा और गरिमा पर एक तनावपूर्ण माहौल बनाया।
2017 की "Egyptian Misery" लगभग 3,000 Egyptian pounds (लगभग USD 175 उस समय) खर्च कर बनाई गयी और यह उसी नाम के फेसबुक पेज पर भेजी गयी गुमनाम कबूलियों पर आधारित थी। खे़ला ने तीस कहानियों की समीक्षा की और चार को नाटकीय रूप दिया। फ़िल्म आठ युवा मिस्रवासियों की प्रोफ़ाइल बनाती है और कुछ हैरान करने वाले दृश्य दिखाती है, जैसे रोटी बेचने वाला अपनी बेकारगी की दोहरायी हुई पंक्ति, एक युवक का राज़ीक टेडी बीयर के साथ संबंध, और एक आदमी का ऑनलाइन धोखा जो मित्र द्वारा लेबनानी महिला बनकर किया गया था। अधिकतर भूमिकाएँ प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए फेसबुक के खुले आह्वान से गैर‑पेशेवर अभिनेताओं को लेकर भरी गयीं।
दर्शकों की प्रतिक्रिया मिली‑जुली रही; कई ने अपनी पहचान देखी, कुछ ने फिल्म को ठुकराया, पर अधिकांश ने कहानियों की प्रामाणिकता पर सवाल नहीं उठाया। खे़ला के लिए व्यावहारिक चुनौतियाँ भी रहीं — सड़कों पर दृश्य के लिए अनुमति लेना और टीमों को बिना वेतन काम करने के लिए राज़ी करना। उनके काम में नैतिक बुलाहट और तत्काल सामाजिक मुद्दों पर ध्यान देना प्रमुख रहा है, और वह ऐसे मुद्दे उठाकर व्यापक दर्शक तक पहुँचने की योजना बनाते हैं।
कठिन शब्द
- जद्दोजहद — लगातार कठिन संघर्ष या मुकाबलाजद्दोजहदों
- परख — किसी चीज़ की जांच या मूल्यांकन करना
- प्रामाणिकता — किसी बात या प्रदर्शन की सच्चाई और विश्वसनीयता
- गुमनाम — पहचान बताये बिना; नाम छिपा हुआ
- व्यावहारिक — हाथ‑अमल में काम आने वाला और उपयोगी
- बुलाहट — किसी विचार या काम के लिये आग्रह या अपील
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- खे़ला प्रामाणिकता बनाए रखने के लिये गैर‑पेशेवर अभिनेताओं का उपयोग करते हैं; आप इस चुनाव के फायदे और नुकसान क्या सोचते हैं? उदाहरण दीजिए।
- कम बजट (लगभग 3,000 Egyptian pounds) में बनी फिल्मों के समाज पर क्या प्रभाव हो सकते हैं? अपने विचार बताइए।
- खे़ला अपनी फिल्मों में नैतिक बुलाहट और तत्काल सामाजिक मुद्दे उठाते हैं; ऐसे विषय व्यापक दर्शक तक पहुँचने पर किस तरह असर डाल सकते हैं?
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