दक्षिण कोरिया में कई युवा पुरुषों का राजनीतिक रुख हाल में दाहिनी ओर शिफ्ट हुआ है, और यह बदलाव सर्वेक्षणों व चुनाव परिणामों में स्पष्ट दिखता है। Hankook Research और Sisa In के साथ किए गए एक सर्वे में 2,000 से अधिक मतदाताओं से पूछा गया और अधिकतम 239 प्रश्न शामिल थे। John Kuk ने कहा कि 18–29 आयु के पुरुष नारीवाद, पुनर्वितरण नीतियों और आव्रजन पर अन्य समूहों की तुलना में अधिक रूढ़िवादी थे।
सर्वे के उदाहरणों में उच्च सार्वजनिक पदों के लिए जेंडर कोटाओं पर मतभेद दिखे। युवा पुरुषों ने कोटाओं के खिलाफ अधिक प्रतिक्रिया दी जबकि महिलाएं अधिक सहमत रहीं। इसी तरह कुछ युवा पुरुषों ने पुरुषों के अधिकारों का समर्थन करने वाले नारे का समर्थन किया, जबकि महिलाएं अधिक असहमत रहीं।
फिर भी सर्वे से पता चला कि कई युवा पुरुष लोकतंत्र के नियमों के प्रति प्रतिबद्ध हैं; इन्होंने सत्ता के लिए बल के प्रयोग को खारिज किया और चुनाव में बड़े स्तर की धोखाधड़ी के आरोपों पर संदेह जताया। यही रुझान जून के चुनाव में भी परिलक्षित हुआ।
कठिन शब्द
- दाहिना — राजनीति में परंपरा और कम बदलाव वाला पक्षदाहिनी
- सर्वेक्षण — लोगों से जानकारी इकट्ठा करने की जांचसर्वेक्षणों, सर्वे
- रूढ़िवादी — परंपरागत विचारों और नियमों का समर्थन करने वाला
- जेंडर कोटा — लैंगिक समूहों के लिए आरक्षित स्थान या सीटजेंडर कोटाओं
- पुनर्वितरण — सम्पत्ति या संसाधन लोगों में बांटना या बदलना
- आव्रजन — एक जगह से दूसरी जगह लोगों का आने या जाना
- प्रतिबद्ध — किसी नियम या विचार का समर्थन करने वाला
- धोखाधड़ी — सच छुपाकर या झूठ बोलकर धोखा देने का काम
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- आपके अनुसार कुछ युवा पुरुष दाहिनी ओर क्यों शिफ्ट हुए होंगे? अपने दो कारण बताइए।
- जेंडर कोटाओं के खिलाफ और उसके समर्थन में कौन से तर्क हो सकते हैं? आप क्या सोचते हैं?
- यदि आपका देश भी युवा मतदाताओं में ऐसा बदलाव देखे तो चुनाव परिणामों पर क्या असर पड़ सकता है?
संबंधित लेख
UNESCO रिपोर्ट: गरीब देशों में शिक्षा डेटा और लड़कियों की चुनौतियाँ
UNESCO की रिपोर्ट ने गरीब देशों के प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा डेटा में बड़े अंतर दिखाए और बताया कि कई निम्न-आय देशों में विज्ञान का आकलन उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट ने लड़कियों की पढ़ाई में रोड़े और बेहतर निगरानी की जरूरत पर भी जोर दिया।