वैश्विक तापमान पिछले वर्ष प्री‑औद्योगिक स्तर से 1.5°C से अधिक हो गया, और यह पहली बार दर्ज हुआ। Aalto University के शोधकर्ताओं ने 30 प्रमुख और कम‑प्रसिद्ध खाद्य फसलों के लिए 1.5–4°C तक के गर्म होने के परिदृश्यों में संभावित प्रभावों का मॉडलिंग किया। यह अध्ययन Nature Food में प्रकाशित हुआ।
शोध बताते हैं कि निम्न अक्षांश वाले देशों—मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया, सब‑सहारा अफ्रीका और लैटिन अमेरिका—पर सबसे बड़ा दबाव होगा। 2°C वृद्धि पर लगभग एक तिहाई उत्पादन जोखिम में आ सकता है और 3°C पर यह लगभग आधा तक बढ़ सकता है।
अध्ययन में लोबिया और कसावा जैसी कम शोधित फसलों और उष्णकटिबंधीय जड़ फसलों जैसे याम को भी शामिल किया गया। शोधकर्ता कहते हैं कि सीमित अनुकूलन और जलवायु‑रोधी फसलों के बिना खाद्य आपूर्ति और पोषण पर गंभीर प्रभाव होंगे, इसलिए सिंचाई, उर्वरक और एग्रोफोरेस्ट्री में सुधार की सलाह दी गई है।
कठिन शब्द
- वैश्विक — पूरा संसार या दुनिया से जुड़ा
- तापमान — वातावरण या हवा की गर्मी या ठंडक
- प्री‑औद्योगिक — औद्योगिक युग शुरू होने से पहले का समय
- उत्पादन — किसान या मशीन से बनने वाली फसल
- जोखिम — नुकसान या हानि होने की संभावना
- अनुकूलन — परिवर्तन के अनुसार तरीका बदलना
- सिंचाई — खेतों या फसलों को पानी देना
- उर्वरक — मिट्टी की पोषकता बढ़ाने वाला पदार्थ
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चर्चा के प्रश्न
- आपके विचार में 1.5°C से अधिक तापमान से स्थानीय खाद्य आपूर्ति कैसे प्रभावित हो सकती है?
- क्या आपके इलाके में सिंचाई या उर्वरक में बदलाव करना संभव है? क्यों या क्यों नहीं?
- शोध में कम‑प्रसिद्ध फसलों को शामिल करना आपके हिसाब से क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है?