Seed Resilience Project 2023 में लॉन्च हुआ और इसका लक्ष्य जलवायु-रोधी बीजों तक कस्बाई और ग्रामीण किसानों की पहुंच सुधारना है। परियोजना में International Seed Federation, Fair Planet, रवांडा का कृषि मंत्रालय और स्थानीय बीज कंपनियाँ साथ काम कर रही हैं। Fair Planet ने फील्ड ट्रायल और डेटा संकलन किया, जिससे कुछ फसलों में तेज सुधार दिखा।
टमाटर की पैदावार परीक्षणों के बाद राष्ट्रीय औसत से कई गुना बढ़ी और मई 2024 में पत्ता गोभी की उपज 1,400kg से बढ़कर 7,000kg प्रति 0.1 हेक्टेयर तक पहुंची। किसान 60 से अधिक हाइब्रिड किस्मों का परीक्षण कर चुके हैं और कई किस्में खुले परागण किस्मों की तुलना में अधिक उपज देती दिखीं।
परियोजना नर्सरी की सावधानीपूर्वक तैयारी, अंकुरण दर और पौधों के प्रदर्शन की निगरानी पर ध्यान देती है। Fair Planet का डेटा बीज कंपनियों को दिया जाता है ताकि बीज की गुणवत्ता सुधारी जा सके। नेताओं ने कहा कि बड़े पैमाने पर लाने के लिए और निवेश, ज्ञान हस्तांतरण और गुणवत्ता नियंत्रण जरूरी होंगे।
कठिन शब्द
- जलवायु-रोधी — कठोर मौसम में ठीक रहने वाला पौधा
- फील्ड ट्रायल — खेत में नई किस्म का परीक्षण
- डेटा संकलन — जानकारी इकट्ठा करने की प्रक्रिया
- पैदावार — खेत से प्राप्त फसल की मात्रा
- हाइब्रिड किस्म — दो अलग किस्मों से बनाई नई किस्महाइब्रिड किस्मों
- खुले परागण किस्म — प्राकृतिक परागण से बढ़ने वाली किस्मखुले परागण किस्मों
- अंकुरण दर — बीज से पौधा बनने का अनुपात
- गुणवत्ता नियंत्रण — उत्पाद की गुणवत्ता जाँचने का तरीका
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चर्चा के प्रश्न
- आपके नज़दीकी इलाके में ऐसे जलवायु-रोधी बीज कैसे मदद कर सकते हैं?
- किसानों के लिए ज्यादा उपज देने वाली किस्में अपनाने में किस तरह की चुनौतियाँ हो सकती हैं?
- परियोजना को बड़े पैमाने पर लाने के लिए आपको कौन से कदम सबसे जरूरी लगते हैं?