कश्मीर के केसर किसान एल निनो से जुड़ी बारिश और हिमपात की कमी का सामना कर रहे हैं। मौसम में परिवर्तन सीधे फसल और स्थानीय जीवनयापन को प्रभावित कर रहा है, क्योंकि केसर खेती बारिश पर बहुत निर्भर करती है।
मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि यदि जनवरी की वर्षा सामान्य से कम रही तो कई हिस्सों में सूखे जैसा हाल बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नवंबर और दिसंबर के घाटे की पूर्ति के लिए तीन से चार प्रमुख बर्फबारी की घटनाएँ चाहिए, क्योंकि उस अवधि का पानी सिंचाई के लिए जरूरी होता है।
केसर उत्पादन 1990 के दशक के शिखर के बाद घटा है। तब वार्षिक उत्पादन लगभग 15.5 tonnes था और क्षेत्र लगभग 5,700 hectares था। 2016 तक खेती का क्षेत्र घटकर 3,715 hectares रह गया और प्रति हेक्टेयर उत्पादन लगभग 1.88 kg से भी कम रह गया, जबकि अन्य जगहों पर यह लगभग 6 kg था। विशेषज्ञों ने पानी जमा करने, बाढ़ प्रतिरोधी ढाँचे और चेतावनी प्रणाली मजबूत करने जैसे अनुकूलन कदम सुझाए हैं।
कठिन शब्द
- हिमपात — धरती पर बर्फ गिरने की घटना
- जीवनयापन — जीविका और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी चलाना
- वर्षा — आसमान से बरसने वाला पानीबारिश
- सूखा — लंबे समय तक पानी की कमी होनासूखे
- सिंचाई — खेतों को पानी देने की प्रक्रिया
- घाटा — किसी चीज़ की कमी या नुकसानघाटे
- उत्पादन — किसी वस्तु या फसल का बनना
- अनुकूलन — परिवर्तन के अनुसार ढल जाना या बदलना
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चर्चा के प्रश्न
- यदि आपके इलाके में जनवरी की वर्षा कम हो तो स्थानीय किसान क्या उपाय कर सकते हैं? बताइए।
- पानी जमा करने और चेतावनी प्रणाली मजबूत करने से किसानों को कैसे मदद मिल सकती है? अपने विचार लिखिए।
- आपके अनुसार केसर जैसी पानी पर निर्भर फसल की खेती में क्या बदलावा लाना मददगार होगा? कारण बताइए।