पारंपरिक कंप्यूटर चिप्स अपनी भौतिक सीमाओं के करीब हैं और AI के लिए अधिक शक्ति की आवश्यकता बढ़ रही है। कुछ अनुमान बताते हैं कि AI डेटा केंद्रों की ऊर्जा खपत दशक के अंत तक दोगुनी हो सकती है।
इसलिए वैज्ञानिक न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग देख रहे हैं, जिसमें हार्डवेयर सूचना को दिमाग की तरह प्रोसेस करे। University of Missouri की प्रोफेसर Suchi Guha और उनकी टीम सिनैप्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक घटक बना रहे हैं।
ये उपकरण ऑर्गेनिक ट्रांजिस्टर का उपयोग करते हैं ताकि स्मृति और प्रोसेसिंग एक साथ रहें। इससे बार-बार डेटा भेजने की जरूरत कम होगी और ऊर्जा बच सकती है।
कठिन शब्द
- पारंपरिक — पहले से प्रचलित और सामान्य तरीका या शैली
- सीमा — किसी चीज़ का अधिकतम या अंत बिंदुसीमाओं
- ऊर्जा खपत — किसी सिस्टम द्वारा उपयोग की गई बिजली मात्रा
- न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग — हार्डवेयर जो दिमाग की तरह सूचना संसाधित करे
- सिनैप्स — दिमाग के छोटे कनेक्शन या जोड़
- ट्रांजिस्टर — एक इलेक्ट्रॉनिक घटक जो सिग्नल नियंत्रित करता है
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आप समझा सकते हैं कि स्मृति और प्रोसेसिंग एक साथ रहने का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
- क्या आपके ख्याल में AI के लिए कम ऊर्जा वाले चिप्स क्यों महत्वपूर्ण हैं?
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