छात्रों पर किए गए एक छोटे पायलट अध्ययन में शोधकर्ताओं ने एक संक्षिप्त वर्चुअल रियलिटी सिमुलेशन का उपयोग कर मृत्यु-चिंता और तनाव में बदलाव मापा। यह शोध Frontiers in Virtual Reality में प्रकाशित हुआ और नेतृत्व Zhipeng Lu तथा उनके डॉक्टोरल छात्र Parya Khadan ने किया।
प्रतिभागियों ने सत्र से पहले और बाद सर्वे भरे। सत्र के बाद उन्होंने मृत्यु के भय में लगभग 75% कमी रिपोर्ट की। अध्ययन ने दोनों — तनाव और मृत्यु चिंता — के प्रभावों का मूल्यांकन किया और दोनों में उल्लेखनीय कमी देखी गई।
VR सिमुलेशन में तीन चरण थे: शरीर से बाहर जाने जैसा अनुभव, प्रकाश की ओर यात्रा जिसमें स्मरण आते हैं, और एक शांत परिदृश्य जहाँ आगे एक बाधा दिखती है। कई प्रतिभागियों ने अपने जीवन और रिश्तों पर नए सिरे से सोचना बताया, जबकि कुछ ने सत्र के बाद बढ़ी चिंता दर्ज की।
कठिन शब्द
- पायलट — छोटा प्रारंभिक परीक्षण या अध्ययन
- वर्चुअल रियलिटी — कंप्यूटर पर बनाया हुआ आभासी वास्तविकता अनुभव
- मृत्यु-चिंता — मरने के बारे में लगातार घबराहट या भय
- प्रतिभागी — अध्ययन में भाग लेने वाला व्यक्तिप्रतिभागियों
- सत्र — एक बार होने वाला परीक्षण या बैठक
- परिदृश्य — देखने वाला प्राकृतिक या काल्पनिक दृश्य
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- यदि आप ऐसे एक VR सत्र में जाएँ, तो आपके जीवन के किन पहलुओं पर सोच बदल सकती है? बताइए।
- यह अध्ययन छोटा पायलट था। आप क्या सुझाव देंगे ताकि भविष्य के अध्ययन बड़े और बेहतर हों?
- सत्र से पहले और बाद सर्वे भरने का क्या लाभ है? संक्षेप में बताइए।