यह अध्ययन Duke Health के नेतृत्व में University of Minnesota के सहयोग से किया गया और परिणाम Aging Cell में प्रकाशित हुए। शोधकर्ताओं ने North Carolina-आधारित बड़े समूह से 1,200 से अधिक रक्त नमूने विश्लेषित किये और जीवित रहने के परिणाम राष्ट्रीय मृत्यु रिकॉर्ड से जोड़े।
टीम ने 828 अलग-अलग छोटे RNAs को मापा और 187 क्लिनिकल कारकों की जाँच की। तुलना के लिए कारणात्मक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग विधियों का उपयोग किया गया। उन्नत सांख्यिकीय मॉडल दिखाते हैं कि सिर्फ छह piRNAs का समूह दो-वर्षीय जीवित रहने की भविष्यवाणी बहुत सटीकता से कर सका—लगभग 86% तक। यह परिणाम एक स्वतंत्र बुजुर्ग समूह में भी पुष्ट हुआ।
शोध में यह भी पाया गया कि कुछ piRNAs के निम्न स्तर लंबे समय तक जीवित रहने से जुड़े थे, जो सरल जीवों में समान पैटर्न से मेल खाता है। आगे के कदमों में यह परीक्षण शामिल है कि क्या उपचार, जीवनशैली या दवाइयाँ जैसे GLP-1-आधारित चिकित्साएँ piRNA स्तर बदल सकती हैं। फंडिंग NIH संस्थानों से मिली है।
कठिन शब्द
- piRNA — छोटे RNA अणु जो जीन नियंत्रण में काम करते हैंpiRNAs
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता — कम्प्यूटर में मानव जैसी सोच दिखाने वाली तकनीक
- मशीन लर्निंग — डेटा से सीखकर निर्णय लेने वाली तकनीक
- सांख्यिकीय मॉडल — आँकड़ों पर बने गणितीय गणना के तरीके
- नमूना — जांच के लिए लिया गया कोई भौतिक पदार्थनमूने
- भविष्यवाणी — भविष्य में होने वाली बात का अनुमान लगाना
- फंडिंग — किसी काम या शोध के लिए दिया गया पैसा
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- अगर दवाइयाँ या जीवनशैली piRNA स्तर बदल सकती हैं, तो इससे बुजुर्गों की सेहत पर क्या असर पड़ सकता है?
- आपके अनुसार मशीन लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस तरह के जीवनीय अनुसंधान में कैसे मदद करती हैं?
- 86% सटीकता वाले परीक्षण को आप कितना उपयोगी मानेंगे और क्यों?