लेवोडोपा पार्किंसन रोग का सामान्य इलाज है और इसे मस्तिष्क में डोपामाइन में बदला जाता है। जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, मरीजों को अक्सर लेवोडोपा के प्रभाव बढ़ाने के लिए अतिरिक्त दवाएँ दी जाती हैं।
येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोध (Nature Microbiology में प्रकाशित) ने दर्शाया कि COMT-इन्हिबिटर नामक दवाएँ आंत के माइक्रोबायोम की रचना बदल सकती हैं। शोध टीम ने पाया कि इन दवाओं में जीवाणुनाशक गुण भी हो सकते हैं और वे कुछ बैक्टीरिया मार देती हैं।
जब कुछ बैक्टीरिया मरते हैं, तो Enterococcus faecalis जैसे अन्य बैक्टीरिया अधिक बढ़ सकते हैं। यह बैक्टीरिया आंत में लेवोडोपा को मेटाबोलाइज कर देता है और दवा का मस्तिष्क तक पहुँचना कम कर देता है। शोध यह भी बताता है कि यह प्रभाव जिगर के बजाय आंत के माइक्रोबायोम से हो रहा है।
कठिन शब्द
- लेवोडोपा — पार्किंसन के लक्षण कम करने वाली दवा
- डोपामाइन — मस्तिष्क में काम करने वाला रासायनिक संदेशवाहक
- इन्हिबिटर — किसी क्रिया या एंजाइम को रोकने वाली दवाCOMT-इन्हिबिटर
- माइक्रोबायोम — आंत में रहने वाले सूक्ष्मजीवों का समूह
- जीवाणुनाशक — बैक्टीरिया को मारने या रोकने वाला गुण
- मेटाबोलाइज — दवा या पदार्थ को शरीर में बदलना या तोड़ना
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- आप कैसे समझते हैं कि आंत का माइक्रोबायोम दवाओं के असर को बदल सकता है?
- अगर कुछ दवाएँ बैक्टीरिया मारकर माइक्रोबायोम बदल देती हैं, तो मरीजों के इलाज में कौन सी मुश्किलें आ सकती हैं?
- इस शोध के नतीजों को देखकर आप इलाज या दवा चुनने में क्या सुझाव देंगे?
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