Tufts University के शोधकर्ताओं ने NeuroBridge विकसित किया है ताकि न्यूरोटिपिकल लोग यह सीख सकें कि ऑटिस्टिक लोग संवाद को कैसे ग्रहण करते हैं। लेख में बताया गया है कि ऑटिस्टिक लोग गैर-मौखिक संकेतों पर कम निर्भर हो सकते हैं और व्यंग्य या रूपक को कभी-कभी शाब्दिक रूप से ले लेते हैं। इसके कारण सामाजिक और कार्यस्थल की बातचीत प्रभावित हो सकती है।
NeuroBridge बड़े भाषा मॉडल्स का उपयोग कर एक संवाद परिदृश्य बनाता है और हर स्थिति के लिए तीन उत्तर विकल्प देता है। विकल्पों का मतलब समान रहता है पर टोन, स्पष्टता और वाक्यरचना में अंतर होता है। उपकरण का उद्देश्य न्यूरोटिपिकल लोगों को अधिक स्पष्ट, संक्षिप्त और सुव्यवस्थित भाषा की ओर प्रशिक्षित करना है, जिसे लेख में "ग्राइसियन अधिकतम" संदर्भ में बताया गया है।
परियोजना का एक पेपर 27th International ACM SIGACCESS Conference on Computers and Accessibility में प्रकाशित किया गया। पीएचडी छात्र Rukhshan Haroon ने कहा कि यह ऑन-डिमांड अनुवादक नहीं है, बल्कि लोगों को अनुभव और फ़ीडबैक देकर भाषा बदलने का तरीका सिखाता है। टीम ने ऑटिस्टिक स्वयंसेवकों के बोर्ड से पुनरावृत्त फ़ीडबैक लेकर डिजाइन सुधारा और उपकरण को कुछ प्रतिभागियों के साथ परीक्षण किया, जहाँ सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। अब टीम Tufts के न्यूरोडाइवर्स छात्रों के समर्थन और कैंपस संसाधनों के साथ काम करने की योजना बना रही है।
कठिन शब्द
- ग्रहण करना — किसी सूचना या संदेश को समझना या स्वीकार करनाग्रहण करते हैं
- गैर-मौखिक — बोलकर नहीं दिए जाने वाले संकेत या व्यवहार
- व्यंग्य — ऐसा बोलना जिसमें सच का उल्टा अर्थ निकले
- रूपक — किसी बात को किसी दूसरी चीज़ से दिखाने वाली भाषा
- शाब्दिक — शब्दों के सीधे या वास्तविक अर्थ से जुड़ा हुआ
- वाक्यरचना — शब्दों को सही क्रम में रखने का तरीका
- फ़ीडबैक — किसी काम पर दी गई प्रतिक्रिया या सुझाव
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- आप सोचते हैं कि स्पष्ट और संक्षिप्त भाषा सीखने से कार्यस्थल पर बातचीत कैसे बदल सकती है?
- क्या आप बेहतर प्रशिक्षण (जैसे NeuroBridge) और ऑन-डिमांड अनुवादक में से किसे पसंद करेंगे? अपने कारण बताइए।
- कैंपस पर ऐसे उपकरण लागू करने से ऑटिस्टिक छात्रों को कौन से व्यावहारिक लाभ मिल सकते हैं?