COP30 में आदिवासी ज्ञान से जलवायु अनुकूलनCEFR B1
26 नव॰ 2025
आधारित: Liam Anderson, Global Voices • CC BY 3.0
फोटो: Daniel Granja, Unsplash
12 नवंबर को COP30 के Blue Zone में सिनैया डो वेल ने ‘‘From on the ground to the world — and back: Indigenous pathways to adapting to climate change’’ शीर्षक का कार्यक्रम नेतृत्व किया। डो वेल ने बताया कि वह जलवायु वैज्ञानिक हैं और आदिवासी कॉकस की सह-अध्यक्ष व CIR के DGTAMC समन्वयक भी हैं। उन्होंने 30 वर्षों से अधिक समय तक आदिवासी ज्ञान के साथ काम किया है।
पैनल में Norwegian Ministry for the Environment (NICFI), UNFCCC, Green Climate Fund, Global Partnership of Indigenous Peoples (Elatia) और Tenure Facility शामिल थे। डो वेल ने कहा कि आदिवासी समुदाय पारंपरिक और वैज्ञानिक ज्ञान मिलाकर अनुकूलन योजना बनाते हैं। वे पक्षियों के गीत, बोने और कटाई के चक्र और अनिंगा पौधे का व्यवहार जैसे संकेतक उपयोग करते हैं।
डो वेल ने रोराइमा की 2024 आगों का उदाहरण दिया। ग्रामीण क्षेत्रों का 80 प्रतिशत प्रभावित हुआ और Inpe ने 1,692 आगें 1–23 फरवरी 2024 दर्ज कीं। उन्होंने कहा कि आगें जैव विविधता, औषधीय पौधे और बु रिटी जैसी प्रजातियाँ नष्ट करती हैं और अनुकूलन कार्य के लिए धन आवश्यक है।
कठिन शब्द
- स्वदेशी — जो अपने देश के मूल निवासी हैं।स्वदेशी लोग
- जलवायु — धरती का मौसम और वातावरण।जलवायु परिवर्तन, जलवायु संकट, जलवायु मुद्दों, जलवायु अनुकूलन
- पारिस्थितिकीय — प्राकृतिक पर्यावरण से संबंधित।
- महत्त्व — कोई चीज़ कितनी महत्वपूर्ण है।महत्व
- नीति — संस्थान के दिशा-निर्देश और प्रक्रियाएं।नीति निर्माण
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- स्वदेशी ज्ञान का महत्व किन तरीकों से दर्शाता है?
- जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए और क्या उपाय हो सकते हैं?
- आपके समुदाय में जलवायु संकट का क्या असर है?