वॉशिंगटन विश्वविद्यालय की एक टीम ने सात लोकप्रिय एजेंट-आधारित ब्राउज़र की जाँच की और पाया कि चार ब्राउज़र में same-origin policy नामक सुरक्षा नियम को बायपास करने के रास्ते थे। यह नीति अलग-अलग वेबसाइटों को एक ही ब्राउज़र में एक-दूसरे के डेटा तक पहुँचने से रोकती है। प्रोफेसर फ्रांज़िस्का रोएज़नर ने कहा कि यह नीति आधुनिक ब्राउज़रों में जानकारी की सुरक्षा के लिए मूलभूत है।
शोधकर्ताओं ने ChatGPT Atlas पर एक प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट हमला चलाया। परीक्षण में एक वेबसाइट ने दूसरी साइट को एम्बेड कर उससे जानकारी चुराई, उदाहरण के तौर पर किसी ईमेल साइट के संवेदनशील डेटा को विज्ञापन के जरिये हासिल करना। शोध में Chrome with Gemini, Claude for Chrome और Perplexity Comet में भी समान समस्या मिली।
अध्ययन ने दो तकनीकी जोखिम बताए: प्रॉम्प्ट इंजेक्शन, जहाँ छिपे निर्देश एजेंट से डेटा लवा सकते हैं; और मेमोरी पॉइज़निंग, जहाँ एजेंट की स्टोर की गई जानकारी मिश्रित हो सकती है। टीम ने अपनी खोजें कंपनियों को साझा कीं और अध्ययन एक कार्यशाला में प्रस्तुत किया गया।
कठिन शब्द
- नीति — कुछ नियम या तरीका जो व्यवहार तय करते हैं
- सुरक्षा — जानकारी और सिस्टम को खतरे से बचाने की स्थिति
- एजेंट-आधारित — छोटे स्वचालित प्रोग्रामों या एजेंटों पर चलने वाला
- एम्बेड — एक वेबसाइट के अंदर दूसरी साइट जोड़ना या दिखाना
- संवेदनशील — गोपनीय या निजी जानकारी से जुड़ा हुआ
- प्रॉम्प्ट इंजेक्शन — छिपे निर्देश जो एजेंट से डेटा निकाल सकते हैं
- मेमोरी पॉइज़निंग — एजेंट की स्टोर की जानकारी में गलत मिलावट
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- अगर किसी ब्राउज़र में वेबसाइटें एक-दूसरे का डेटा देख सकती हों तो आप अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाएंगे?
- प्रॉम्प्ट इंजेक्शन और मेमोरी पॉइज़निंग को साधारण शब्दों में समझाइए और बताइए ये क्यों खतरनाक हैं।
- टीम ने अपनी खोजें कंपनियों के साथ साझा कीं; ऐसा करना आपके हिसाब से क्यों जरूरी है?