संयुक्त राज्य अमेरिका में युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञों के लिए एक गंभीर विषय बना हुआ है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2007 से 2021 के बीच 10 से 24 वर्ष की आयु के युवाओं में आत्महत्या की दर में 62 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके साथ ही, वर्ष 2021 में इस आयु वर्ग में आत्महत्या मृत्यु का दूसरा सबसे प्रमुख कारण बनकर उभरी।
हाल ही में अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने कॉलेज छात्रों के बीच डिजिटल तकनीक के अत्यधिक उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बीच एक स्पष्ट संबंध उजागर किया है। बोस्टन यूनिवर्सिटी चोबानियन एंड एवेडिसियन स्कूल ऑफ मेडिसिन के सहायक प्रोफेसर संगबिन ओह के नेतृत्व में किए गए इस शोध में पाया गया कि अत्यधिक स्क्रीन समय बिताना और ऑनलाइन उत्पीड़न का शिकार होना, दोनों ही स्थितियां स्वतंत्र रूप से छात्रों में आत्महत्या के विचारों के जोखिम को बढ़ाती हैं।
इस अध्ययन के लिए अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 18 से 25 वर्ष की आयु के छात्रों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। ये आंकड़े हेल्दी माइंड्स नेटवर्क से प्राप्त किए गए थे, जिसमें बोस्टन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लॉस एंजिल्स, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन और वेन स्टेट यूनिवर्सिटी शामिल हैं। यह शोध यह स्पष्ट करता है कि डिजिटल वातावरण युवाओं के मानसिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित कर रहा है।
कठिन शब्द
- शोधकर्ता — किसी विषय पर नया ज्ञान खोजने वाला व्यक्ति।शोधकर्ताओं
- आंकड़ा — संख्या के रूप में दी गई जानकारी।आंकड़ों, आंकड़े
- उत्पीड़न — किसी व्यक्ति को परेशान या दुखी करना।
- विश्लेषण — किसी विषय या डेटा की गहराई से जांच।
- जोखिम — किसी खतरे या नुकसान की संभावना।
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चर्चा के प्रश्न
- डिजिटल तकनीक का अत्यधिक उपयोग युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर सकता है?
- ऑनलाइन उत्पीड़न से बचने के लिए छात्रों और शिक्षण संस्थानों को क्या कदम उठाने चाहिए?