सर्वोच्च न्यायालय और अरावली: नई परिभाषा पर विवादCEFR B1
31 जन॰ 2026
आधारित: Abhimanyu Bandyopadhyay, Global Voices • CC BY 3.0
फोटो: Agnese Kisune, Unsplash
अरावली पर्वतमाला गुजरात से नई दिल्ली तक लगभग 670 किलोमीटर तक फैली हुई है और इसे हिमालयों से भी पुराना माना जाता है। यह श्रृंखला भूमिगत जल के पुनर्भरण में मदद करती है, थार मरुस्थल के पूर्वी फैलाव को धीमा करती है और गर्मी की लहरों व प्रदूषित क्षेत्रों में तापमान नियंत्रित करने में सहायक है।
20 नवंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित अरावली की भौगोलिक परिभाषा बदलने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। नई नियमावली के तहत केवल वही भू-आकृतियाँ अरावली मानी जाएँगी जो स्थानीय जमीन के स्तर से कम-से-कम 100 मीटर ऊँची उठती हों। न्यायालय ने क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर अस्थायी रोक लगा दी, लेकिन दीर्घकालिक सुरक्षा केवल उन पहाड़ियों पर ही मानी जाएगी जो 100 मीटर की सीमा पूरी करें।
इस फैसले पर देशभर में विरोध और रैलियाँ हुईं। गुरुग्राम में फरवरी 2025 के संकट के बाद सक्रियता बढ़ी; 24 फरवरी को एक सड़क प्रस्ताव आया और 27 फरवरी को स्थानीय लोग विरोध में मेट्रो स्टेशनों पर गए। सक्रियकर्ताओं ने बताया कि पहले भी 2002 और 2009 के प्रतिबंधों के बावजूद अवैध खनन जारी रहा और उन्होंने बेहतर प्रवर्तन, टोल-फ्री नंबर और ड्रोन निगरानी की माँग रखी।
कठिन शब्द
- पुनर्भरण — भूमिगत जल को फिर से भरने की प्रक्रिया
- फैलाव — किसी चीज़ का फैलना या विस्तृत होना
- नियमावली — कुछ कामों के लिए लिखित नियमों का समूह
- खनन — धरती से खनिज निकालने की प्रक्रिया
- अवैध — कानून के अनुसार न किया जाने वाला
- प्रवर्तन — कानून या नियम लागू करने की क्रिया
- निगरानी — किसी काम या जगह को देखना और जांचना
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आप सोचते हैं कि केवल 100 मीटर ऊँचाई की सीमा अरावली की सुरक्षा के लिए सही है? अपने जवाब में एक कारण बताइए।
- आपके इलाके में निगरानी और प्रवर्तन कैसे बेहतर हो सकते हैं? दो आसान सुझाव दीजिए।
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