संयुक्त राज्य अमेरिका में फेफड़ों का कैंसर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। अक्सर मरीज मानक कीमोथेरेपी और अन्य दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं, जिससे इलाज कठिन हो जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए स्टोनी ब्रुक कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं ने जिंगफैंग जू के नेतृत्व में एक नई थेरेपी विकसित की है।
शोध पत्रिका मॉलिक्यूलर थेरेपी में प्रकाशित परिणामों के अनुसार, जेम-एमआईआर-129 नामक यह नया एजेंट एक प्राकृतिक ट्यूमर-रोधी अणु और कीमोथेरेपी दवा को जोड़ता है। यह स्वतंत्र रूप से कैंसर कोशिकाओं में प्रवेश करता है और कैंसर को बढ़ावा देने वाले तीन मुख्य प्रोटीनों (HMGB1, YAP1 और PBX3) को निष्क्रिय कर देता है।
प्रयोगशाला में चूहों पर किए गए परीक्षणों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिणाम मिले:
- ट्यूमर के आकार में 95 प्रतिशत से अधिक की भारी कमी दर्ज की गई।
- उपचार प्राप्त करने वाले चूहों के जीवित रहने की अवधि कई सप्ताह तक बढ़ गई।
- दवा का परीक्षण मॉडल पर कोई हानिकारक विषाक्त दुष्प्रभाव नहीं दिखा।
शोध दल अब इस एजेंट की सुरक्षा रूपरेखा तय करने के लिए आवश्यक अध्ययन कर रहा है, जिससे भविष्य में मानव नैदानिक परीक्षण संभव हो सकें। इस अध्ययन को वेटरन्स अफेयर्स मेरिट अवार्ड और स्थानीय कैंसर सेंटर फंड से वित्तीय सहायता मिली है।
कठिन शब्द
- प्रतिरोध — किसी दवा या प्रभाव को रोकने की क्षमता।
- समाधान — किसी मुश्किल समस्या को दूर करने का उपाय।
- निष्क्रिय — जो काम न कर रहा हो या असरहीन हो।
- दुष्प्रभाव — किसी उपचार का शरीर पर होने वाला बुरा असर।
- नैदानिक — रोगों की जाँच और उपचार से जुड़ा हुआ।
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चर्चा के प्रश्न
- कैंसर के इलाज में दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित होना मरीजों के लिए किस प्रकार खतरनाक हो सकता है?
- प्रयोगशाला के सफल परीक्षणों के बाद भी दवाओं को सीधे इंसानों पर आजमाने से पहले सुरक्षा अध्ययन करना क्यों जरूरी है?