स्वास्थ्य विशेषज्ञ महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रारंभिक पता लगाने के लिए मैमोग्राम कराने की सलाह देते हैं। घने स्तन ऊतक वाली महिलाओं में अल्ट्रासाउंड और मैमोग्राम की छवियाँ कम स्पष्ट हो जाती हैं क्योंकि ध्वनि बिखरकर "एकॉस्टिक क्लटर" पैदा करती है। इस स्थिति में साधारण तरल‑भरी सिस्ट भी ठोस मास जैसे दिख सकती है और गलत निदान हो सकता है।
अनुसंधान टीम ने सिग्नल‑प्रोसेसिंग का एक नया कोहेरेंस‑आधारित तरीका रिपोर्ट किया जो संकेतों की सुसंगति मापता है और छवियों को साफ़ करता है। यह तरीका तरल और ठोस मासों के बीच अंतर बहुत बेहतर ढंग से कर पाता है। 132 रोगियों के अध्ययन में नया तरीका 96% सटीक था, जबकि पारंपरिक उपकरण 67% पर रहे।
वरिष्ठ लेखिका Muyinatu "Bisi" Bell (Johns Hopkins University) और सहलेखक Eniola Oluyemi (Johns Hopkins Medicine) ने कहा कि यह बदलाव झूठे सकारात्मक और अनावश्यक फॉलो‑अप व बायोप्सियों को कम कर सकता है। शोध Radiology Advances में प्रकाशित हुआ और National Institutes of Health ने वित्तपोषण दिया।
कठिन शब्द
- मैमोग्राम — स्तन की बीमारी देखने की छवि जांच
- अल्ट्रासाउंड — उच्च आवृत्ति ध्वनि से अंदर देखना
- एकॉस्टिक क्लटर — ध्वनि बिखरने से बनता हुआ अव्यवस्थित शोर
- सुसंगति — किसी संकेत की एक जैसा या मेल होना
- बायोप्सी — रोगी ऊतक का परीक्षण हेतु छोटा नमूनाबायोप्सियों
- वित्तपोषण — किसी काम के लिए आर्थिक सहायता या धन
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- अगर आपको या आपकी किसी परिचित को स्तन जांच करानी पड़े, क्या आप नए तरीके को चुनेंगे? क्यों?
- झूठे सकारात्मक और अनावश्यक बायोप्सियों में कमी से मरीजों पर क्या असर होगा?
- क्या आप सोचते हैं कि ऐसे शोध में वित्तपोषण महत्वपूर्ण है? अपने कारण बताइए।