Journal of Experimental Biology में प्रकाशित एक अध्ययन में दिखाया गया कि मच्छर अपनी जानकारी के आधार पर DEET की गंध को भोजन से जोड़ कर सीख सकते हैं। शोधकर्ता प्रयोगों में पावलोवियन कंडीशनिंग का उपयोग कर रहे थे। उन्होंने Aedes aegypti मच्छरों के साथ काम किया, जो डेंगू, ज़ीका और पीला बुखार फैलाने वाली प्रजाति है और जिनसे हर साल दसियों मिलियन लोग संक्रमित होते हैं।
प्रयोग में मच्छरों को कपड़े की जाली के पीछे रोका गया और गर्म खून की थैली उनकी पहुंच से थोड़ी दूर रखी गई। जब मच्छर खाने लगते थे, तब DEET की गंध पेश की गई। चार बार यह प्रक्रिया दोहराने पर केवल DEET की गंध पर 60% से अधिक मच्छरों ने खाने की कोशिश की।
एक अन्य परीक्षण में प्रशिक्षित मच्छर DEET लगे हाथ की ओर गए, जबकि बिना प्रशिक्षण वाले मच्छर उस हाथ से बचे। शोधकर्ता कहते हैं कि यह खोज यह दर्शाती है कि अनुभव मच्छर के व्यवहार को बदल सकता है, लेकिन वे DEET के उपयोग बंद करने का सुझाव नहीं देते।
कठिन शब्द
- पावलोवियन कंडीशनिंग — सीखने का तरीका जिसमें संकेत जुड़ते हैं
- प्रजाति — एक जैविक समूह या जनसमूह
- संक्रमित — किसी रोग से ग्रसित होना या फैलना
- गंध — हवा में महसूस होने वाली खुशबू
- व्यवहार — किसी जीव का प्रतिक्रिया या काम करने का तरीका
- प्रशिक्षित — किसी कार्य के लिए सीखाया गया या तैयार
- अनुभव — किसी घटना से मिली जानकारी या ज्ञान
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- आप कैसे समझते हैं कि मच्छरों का सीखना उनके व्यवहार को बदल सकता है? अपने विचार लिखिए।
- अगर मच्छर DEET की गंध को भोजन से जोड़ लें तो मच्छर नियंत्रण के तरीके क्या बदल सकते हैं? कुछ सुझाव दीजिए।
- क्या आप व्यक्तिगत रूप से DEET का इस्तेमाल करेंगे या किसी अन्य उपाय पर भरोसा करेंगे? अपने कारण बताइए।