शोध से पता चलता है कि मानव ध्यान एक नियमित चक्र में चलता है, जिसकी आवृत्ति लगभग सात से दस बार प्रति सेकंड है। ये चक्र ध्यान के ऐसे क्षणों से मिलते हैं जब लक्ष्य की पहचान बेहतर या खराब होती है। जब पहचान खराब होती है, प्रतिभागी विकर्षकों से अधिक प्रभावित होते हैं, और इसलिए पॉप-अप तथा नोटिफिकेशन तुरंत ध्यान खींच सकते हैं।
यह काम University of Rochester के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में PLOS Biology में प्रकाशित हुआ। टीम ने EEG रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल करके 40 प्रतिभागियों पर प्रयोग किया। प्रतिभागियों को स्क्रीन के केंद्र में धुंधला ग्रे वर्ग दिखाया गया और रंगीन बिंदु विकर्षक बने रहे। आंखों की हरकत वाले डेटा हटाकर शोध ने नज़र की दिशा नहीं बल्कि ध्यान के आंतरिक बदलावों को मापा।
लेखक Ian Fiebelkorn बताते हैं कि मस्तिष्क वैकल्पिक रूप से ऐसी अवस्थाओं के बीच चलता है जो वर्तमान फोकस को संसाधित करने या ध्यान बदलने की संभावना बढ़ाने के पक्ष में होती हैं। वे सुझाव देते हैं कि यह वैकल्पिकता यदि घटे, जैसा कि ADHD वाले कुछ लोगों में हो सकता है, तो संज्ञानात्मक लचीलापन कम हो सकता है। शोधकार कहते हैं कि ये परिणाम फोकस सुधारने की नई रणनीतियाँ विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।
- पद्धति: EEG से मस्तिष्क सिग्नल रिकॉर्ड किए गए।
- नमूना: 40 प्रतिभागी परीक्षण में थे।
- प्रकाशन और समर्थन: PLOS Biology में प्रकाशित; NIH, NSF और Searle Scholars ने समर्थित किया।
कठिन शब्द
- आवृत्ति — किसी घटना के होने की प्रति सेकंड संख्या
- विकर्षक — ध्यान भंग करने वाली वस्तु या संकेतविकर्षकों
- रिकॉर्डिंग — डेटा या संकेत का लेखा जोखा बनाना
- आंतरिक — जो बाहर से नहीं बल्कि भीतर से आता है
- संज्ञानात्मक लचीलापन — नई स्थिति के अनुसार जल्दी समायोजित होने की क्षमता
- फोकस — किसी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने की स्थिति
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- आप किन रणनीतियों से पॉप-अप और नोटिफिकेशन का ध्यान पर असर कम कर सकते हैं? उदाहरण दें।
- यदि वैकल्पिकता घटे तो संज्ञानात्मक लचीलापन क्यों कम हो सकता है? अपने शब्दों में समझाइए।
- EEG रिकॉर्डिंग से मिली जानकारी पर आधारित नीतियाँ कैसे फोकस सुधारने में मदद कर सकती हैं?