शोधकर्ताओं ने एक कोटिंग विकसित की है जो सतह पर चोट लगते ही रंग बदलती है और असर का स्थान दिखाती है। यह काम किसी इलेक्ट्रॉनिक सेंसर के बिना होता है, इसलिए साधारण और सस्ता है।
कोटिंग में छोटे कण होते हैं जिनके अंदर रंग बदलने वाला पॉलिमर (polydiacetylene) और बाहर रेशम जैसी परत होती है। जब कोटिंग पर बल लगता है, तो रंग गहरा नीला से चमकता लाल बन जाता है।
रंग बदलने के निशान स्थायी रहते हैं और इसे कागज, प्लास्टिक, लकड़ी और धातु जैसी सतहों पर ब्रश, स्प्रे या ड्रॉप कास्ट से लगाया जा सकता है। संभावित उपयोगों में हेलमेट निगरानी, पैकेज हैंडलिंग और चिकित्सा गति विश्लेषण शामिल हैं।
कठिन शब्द
- कोटिंग — किसी वस्तु की ऊपर की पतली परत
- पॉलिमर — लंबे अणुओं से बना रसायन
- सतह — किसी वस्तु का ऊपर या बाहरी हिस्सासतहों
- निशान — किसी असर या चोट का दिखने वाला चिन्ह
- निगरानी — किसी चीज़ पर ध्यान या जाँच करना
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- अगर यह कोटिंग आपके हेलमेट पर हो तो आपको क्या फायदा होगा?
- आप घर में किस चीज पर यह कोटिंग लगाना चाहेंगे और क्यों?
- स्थायी निशान होने से पैकेज हैंडलिंग में मदद कैसे मिल सकती है?
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