एक निरंतर अध्ययन St. Louis Personality and Aging Network (SPAN) 2007 में शुरू हुआ था। उस समय इसमें लगभग 1,600 मध्यवयीन प्रतिभागी थे और अब उनमें से करीब 500 को दादा-दादी बनने पर आगे ट्रैक किया जा रहा है।
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता बातचीत के विषयों को जानना चाहते हैं और यह भी देख रहे हैं कि ये बातें समय के साथ कैसे बदलती हैं। टीम ने दादा-दादी से उनकी सामान्य बातचीत के विषय पूछे।
नतीजों में डिजिटल संपर्क जैसे फोन कॉल या संदेश सबसे आम पाया गया। शोध से यह भी दिखा कि दादियाँ अक्सर ज्यादा बात करती हैं और काले दादा-दादियों ने नस्ल और पहचान पर अधिक चर्चा बताई। अगले कदमों में पोते-पोतियों के नजरिए भी लेना शामिल है।
कठिन शब्द
- निरंतर — बिना रुकावट, लगातार समय के साथ होता हुआ
- प्रतिभागी — किसी अध्ययन या कार्यक्रम में शामिल व्यक्ति
- शोधकर्ता — अध्ययन करने वाला या वैज्ञानिक व्यक्ति
- बातचीत — दो या अधिक लोगों के बीच बोलचाल
- डिजिटल संपर्क — फोन कॉल या संदेश जैसे इलेक्ट्रॉनिक संचार
- दादी — बच्चों की माँ की माँ, परिवार में बुजुर्ग महिलादादियाँ
- नस्ल — लोगों के जन्म या रंग के आधार पर समूह
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आपके परिवार में दादियाँ अक्सर ज्यादा बात करती हैं? क्यों?
- आप दादा-दादी से किस तरह का डिजिटल संपर्क इस्तेमाल करते हैं?
- पोतों-पोतियों का नजरिया जानने से क्या फायदा हो सकता है?