येल के शोधकर्ताओं ने आनुवंशिक डेटा और जीवाश्म नमूनों को मिलाकर Scombridae का सबसे पूरा समय-समायोजित विकासवृक्ष तैयार किया। यह परिवार ट्यूना और मैकरल के साथ जीवित उष्णरक्त किरण-पंखी मछलियों की कई प्रजातियाँ समेटता है।
विश्लेषण ने Scombridae की उत्पत्ति को K-Pg विलुप्ति या क्षुद्रग्रह प्रहार के नज़दीक रखा, लेकिन बड़े शरीर और उष्णरक्तता जैसे विशेष लक्षण अलग-अलग वंशों में स्वतंत्र रूप से विकसित हुए। शोध में यह भी पाया गया कि ये लक्षण तुरंत नहीं आए और कुछ घटनाएँ बाद में हुईं।
शोध के लेखक बताते हैं कि यह परिणाम संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण कुछ ट्यूना आबादियाँ अति-मत्स्यव्यवसाय से घट चुकी हैं। यह विकासात्मक काम चयापचय और ताप-नियमन समझने में भी मदद दे सकता है। अध्ययन Proceedings of the Royal Society B में प्रकाशित हुआ।
कठिन शब्द
- विकासवृक्ष — प्रजातियों के संबंध दिखाने वाला पेड़
- जीवाश्म — प्राचीन जीवों के कठोर अवशेष
- उष्णरक्तता — शरीर का ताप स्थिर रखने की क्षमता
- संरक्षण — प्राकृतिक संसाधन या जीवों की रक्षा करना
- अति-मत्स्यव्यवसाय — मछलियों को बहुत अधिक पकड़ने का व्यापार
- चयापचय — जीव में ऊर्जा और पदार्थ का आदान-प्रदान
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चर्चा के प्रश्न
- इस शोध के नतीजे मछली संरक्षण में कैसे मदद कर सकते हैं? उदाहरण दें।
- क्या आपको लगता है कि अति-मत्स्यव्यवसाय रोकना आसान होगा? अपने कारण लिखिए।
- शोध में कहा गया कि कुछ विशेषताएँ अलग-अलग वंशों में स्वतंत्र रूप से आईं; यह आपको क्या सोचने पर मजबूर करता है?