अध्ययन में University of Missouri के वैज्ञानिकों ने दिखाया कि सड़क पर डाला गया नमक जब ताजे पानी में पहुँचता है तो वह जलीय जीवों पर प्रभाव डालता है। Rick Relyea और उनकी टीम ने अर्ध-बाहरी प्रयोगों में अलग-अलग नमक स्तरों को शिकारी की उपस्थिति या अनुपस्थिति के साथ मिलाया।
टीम ने पाया कि शिकारी तनाव के साथ उच्च नमक स्तरों पर घोंघों की मृत्यु दर काफी बढ़ गयी; उच्च नमक पर शिकारी के प्रभाव से मृत्यु दर केवल नमक की तुलना में लगभग 60% अधिक हुई। शोध बताता है कि सामान्य प्रयोगशाला अध्ययनों में ये प्रभाव अक्सर दिखते नहीं हैं, इसलिए प्रदूषण की खतरनाकता कम आँकी जा सकती है।
घोंघे कम खाना खाते और कम हिलते हैं ताकि शिकारी ध्यान न दें, जबकि नमक के कारण उन्हें अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इससे उनकी स्थिति नाजुक होती है और मृत्यु का जोखिम बढ़ता है। घोंघे शैवाल नियंत्रित करते हैं, पोषक तत्व पुनर्चक्रित करते हैं और मछलियों व पक्षियों के लिए भोजन देते हैं। शोधकर्ताओं ने नमक कम करने के व्यावहारिक कदम सुझाए हैं, जैसे सड़कों का पूर्व-उपचार, ट्रकों का कैलिब्रेशन और नमक का रणनीतिक उपयोग।
कठिन शब्द
- शिकारी — अन्य जीवों को पकड़ने वाला जानवर
- मृत्यु दर — निर्दिष्ट समय में मरने वालों का अनुपात
- प्रदूषण — पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों की उपस्थिति
- अर्ध-बाहरी — आंशिक रूप से बाहर और आंतरिक दोनों जगह
- पोषक तत्व — जीवों की वृद्धि के लिए आवश्यक रसायन
- कैलिब्रेशन — उपकरण की माप ठीक करने की प्रक्रिया
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आपके इलाके में सर्दियों में सड़क पर नमक डाला जाता है और इससे पास के जलाशयों पर क्या असर हो सकता है?
- यदि आप शहर के यातायात विभाग को सलाह दें तो किन व्यावहारिक कदमों को आप सबसे जरूरी मानेंगे? स्पष्ट कारण दें।
- घोंघों की कमी मछलियों और पक्षियों के खाने पर कैसे असर कर सकती है? अपने विचार संक्षेप में बताइए।