नॉट्रे डेम के वैज्ञानिकों ने दिखाया कि दीर्घकालिक शारीरिक दबाव मस्तिष्क की कोशिकाओं में प्रोग्राम्ड सेल‑डेथ सक्रिय कर सकता है। इससे न्यूरॉन्स की हानि होती है और यह संवेदी, मोटर और सोचने की क्षमताओं को घटा सकता है।
उन्होंने iPSCs (प्रेरित प्लुरीपोटेंट स्टेम कोशिकाएँ) से बने न्यूरॉन और ग्लियल नेटवर्क पर सतत दबाव लागू कर के ग्लियोब्लास्टोमा ट्यूमर जैसा दबाव अनुकरण किया। कोशिकाओं के RNA अनुक्रमण में तनाव-संबंधी परिवर्तन मिले और कुछ मार्ग सूजन और कोशिका मृत्यु से जुड़े दिखे। शोध से दवा विकास के लिए संकेतक मार्ग मिलने की उम्मीद है और यह पद्धति अन्य मस्तिष्क संबंधी यांत्रिक स्थितियों पर भी लागू हो सकती है।
कठिन शब्द
- दीर्घकालिक — लंबे समय तक चलने वाला
- दबाव — किसी चीज पर लगने वाली ताकत
- प्रोग्राम्ड सेल‑डेथ — कोशिकाओं का नियंत्रित मरना
- न्यूरॉन — मस्तिष्क की एक कार्य करने वाली कोशिकान्यूरॉन्स
- ग्लियोब्लास्टोमा — मस्तिष्क में बनने वाला एक ट्यूमर
- सूजन — रोग या चोट पर शरीर की जलन
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आप सोचते हैं कि लंबे समय तक दबाव किसी के सोचने की क्षमता को घटा सकता है? क्यों?
- यह पद्धति दवा विकास में कैसे मदद कर सकती है, अपने शब्दों में बताइए।