भारत में रोहिंग्या और गलत सूचनाएँCEFR B2
11 दिस॰ 2025
आधारित: Zulker Naeen, Global Voices • CC BY 3.0
फोटो: Bornil Amin, Unsplash
2017 से शुरू हुए सैन्य-नियंत्रण वाले नरसंहार के बाद म्यांमार से आए रोहिंग्या शरणार्थी भारत में गलत सूचनाओं और मुस्लिम-विरोधी कथाओं का सामना कर रहे हैं। कई बार बांग्लादेश के शिविरों की तस्वीरें और वीडियो बार-बार री-यूज करके रोहिंग्या को निशाना बनाया गया है। भारतीय फैक्ट-चेकिंग संगठनों ने 2017 और 2025 के बीच इन दावों का लगातार खंडन किया है।
कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों में एक सा पैटर्न दिखा। मई 2018 का वायरल वीडियो और दिसंबर 2018 की तस्वीरें फैक्ट-चेक में गलत निकलीं। 2019 की गर्मियों में फैलाए गए संदेशों ने यह दावा किया कि सैकड़ों सशस्त्र रोहिंग्या बच्चों को अपहरण करने आएंगे; उस फोटो का संबंध किसी अलग मामले से था। इन अफवाहों ने 2017–2019 के बीच 30 से अधिक मोब लिंचिंग मौतों में योगदान दिया। मई 2020 का एक पिटाई वीडियो भी गलत संदर्भ में साझा किया गया था।
गलत सूचनाओं को बल देने में कई ताकतें शामिल रहीं: सरकारी बयान जो रोहिंग्या को अवैध प्रवासी बताते हैं, 2019 का नागरिकता संशोधन अधिनियम जिसने राजनीतिक प्रेरणा बदली, और पहले से मौजूद मुस्लिम-विरोधी भावना। कोविड-19 के समय "कोरोना जिहाद" जैसे दावों ने हमलों और भेदभाव को और बढ़ाया।
रोहिंग्या राज्यविहीन हैं और उनकी मीडिया पहुँच सीमित है, इसलिए डिजिटल आवाज़हीनता गलत सूचनाओं को सुधारना कठिन बनाती है। इन झूठों ने हिरासत, निर्वासन और हिंसा जैसी नीतिगत और सामाजिक परिणामों को जन्म दिया। यह अध्ययन ResearchGate पर प्रकाशित किया गया है।
कठिन शब्द
- नरसंहार — बहुत बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या
- शरणार्थी — जिसे अपने देश से भागकर सुरक्षा चाहिए
- फैक्ट-चेकिंग — सूचनाओं की सच्चाई जांच करने की प्रक्रिया
- मोब लिंचिंग — भीड़ द्वारा हिंसात्मक हत्या या सजा
- नागरिकता संशोधन अधिनियम — नागरिकता के नियमों में बदलाव वाला क़ानून
- डिजिटल आवाज़हीनता — इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर आवाज़ न पहुँच पाना
- निर्वासन — किसी व्यक्ति को देश से बाहर भेजना
- हिरासत — किसी व्यक्ति को गिरफ्तार या रोके रखना
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- लेख में बताए कारणों के आधार पर, आप किन नीतियों से गलत सूचनाएँ और भेदभाव घटाने के सुझाव देंगे? दो सुझाव लिखिए।
- डिजिटल आवाज़हीनता रोहिंग्या के सामाजिक जीवन और नीतिगत नतीजों को कैसे प्रभावित कर सकती है? अपने विचार दें।