'द एलीमेंट्री स्कूल जर्नल' में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय के जो बच्चे अकेले खेलना पसंद करते हैं, वे पूरी तरह खुश और संतुष्ट रह सकते हैं। इस शोध में अमेरिका के जॉर्जिया राज्य के 473 स्कूली बच्चों के सामाजिक व्यवहार और प्राथमिकताओं का विश्लेषण किया गया।
परिणामों से स्पष्ट हुआ कि जो छात्र सामाजिक जुड़ाव को महत्व देते हुए अकेले समय बिताना पसंद करते हैं, वे अपने रिश्तों से संतुष्ट रहते हैं। वे समूह से जुड़े रहने के लिए सहपाठियों के कुछ निमंत्रण स्वीकार करते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर विनम्रता से मना भी कर देते हैं। दोस्तों द्वारा आमंत्रित किए जाने का यह भरोसा उन्हें अकेलेपन के तनाव से बचाता है।
इसके विपरीत, जिन बच्चों ने सामाजिक मेलजोल को पूरी तरह नकार दिया, उन्हें सहपाठियों ने बुलाना बंद कर दिया, जिससे वे खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे। जॉर्जिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर मिशेल लीज़ ने सामाजिक मेलजोल की तुलना व्यायाम और पौष्टिक भोजन जैसी स्वस्थ आदतों से की है।
शोधकर्ताओं का सुझाव है कि शिक्षकों और माता-पिता को बच्चों को बड़े समूहों में जाने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें समान रुचि वाले छोटे समूहों में जुड़ने और आवश्यक सामाजिक कौशल सीखने के लिए प्रेरित करना बेहतर होता है।
कठिन शब्द
- अध्ययन — किसी विषय के बारे में विस्तार से की गई जाँच।
- प्राथमिकता — किसी चीज़ को दूसरों से पहले महत्व देने की स्थिति।प्राथमिकताओं
- संतुष्ट — वह स्थिति जिसमें मन को पूरी शांति और खुशी मिले।
- जुड़ाव — आपसी संबंध या लगाव रखने की भावना।
- उपेक्षित — जिसकी तरफ ध्यान न दिया जाए या जिसे नजरअंदाज किया जाए।
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चर्चा के प्रश्न
- अकेले समय बिताना और दोस्तों के साथ घुलना-मिलना दोनों क्यों महत्वपूर्ण हैं?
- क्या आपको लगता है कि बच्चों को बड़े समूहों में शामिल होने के लिए दबाव डालना सही है? अपने विचार दें।
- स्कूलों में बच्चों को सामाजिक कौशल सिखाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?