शोध टीम ने worldwide जीवाश्म रिकॉर्ड का विश्लेषण करते हुए Neoselachii समूह पर ध्यान दिया, जो आधुनिक शार्क और रे को समेटता है। उन्होंने Cretaceous अवधि तक के 20,000 से अधिक रिकॉर्डों से लगभग 1,500 प्रजातियों की उत्थान और विलुप्ति की आयु पुनर्निर्मित की।
परिणामों में एक स्पष्ट पैटर्न निकला: किसी प्रजाति के उत्पन्न होने के पहले 4 मिलियन वर्ष में उसके विलुप्त होने की संभावना काफी अधिक रहती है बनाम पुराने प्रजातियों के। यह पैटर्न पूरे 145 मिलियन वर्ष के दौरान लगातार रहा, चाहे विलुप्ति का कारण कुछ भी रहा। उदाहरण के लिए, Cretaceous के अंत में लगभग 66 मिलियन वर्ष पहले हुए द्रव्यमान विलुप्ति के दौरान शार्क और रे को भारी क्षति मिली।
डेटा यह भी दिखाते हैं कि पिछले 40 से 50 मिलियन वर्षों में पर्याप्त नई प्रजातियाँ नहीं उभरीं जो पुराने नुकसान की भरपाई कर सकें। लेखक निष्कर्ष निकालते हैं कि प्रजातियों की आयु विकासात्मक समय में विलुप्ति जोखिम की एक स्थिर भविष्यवक्ता है और आज की मानव गतिविधियाँ अतिरिक्त दबाव डालती हैं।
कठिन शब्द
- जीवाश्म — प्राचीन जीवों के पत्थर या अवशेष
- उत्थान — नयी प्रजातियों का उत्पन्न होना या विकास
- विलुप्ति — किसी प्रजाति का खत्म हो जाना
- विश्लेषण — जानकारी को ध्यान से परखना और समझना
- पैटर्न — दोहराने वाला क्रम या रूप
- द्रव्यमान — बहुत बड़ी मात्रा या बहुत व्यापक घटना
- भरपाई — खोए हुए चीज़ की पूर्ति या पुनर्स्थापन
- निष्कर्ष — किसी जानकारी से निकाला हुआ अंतिम विचार
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- लेखक कहते हैं कि आज की मानव गतिविधियाँ अतिरिक्त दबाव डालती हैं। आप किन मानव गतिविधियों को इसका कारण मानते हैं? उदाहरण दें।
- अगर नई प्रजातियाँ पिछले 40–50 मिलियन वर्षों में पर्याप्त नहीं उभरीं, तो भविष्य में जैवविविधता पर क्या प्रभाव हो सकता है? अपने विचार लिखें।
- आपको क्यों लगता है कि किसी प्रजाति के शुरुआती चार मिलियन साल में विलुप्ति जोखिम ज्यादा रहता है? अपने कारण बताइए।