नए अध्ययन से पता चला है कि सिगरेट के प्लास्टिक फिल्टर पानी में मिलकर छोटे माइक्रोफाइबर छोड़ते हैं। ये तंतु जलीय जीवों और पर्यावरण के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं और बड़े पैमाने पर प्रदूषित कर सकते हैं।
Science Advances में प्रकाशित अध्ययन ने 18वीं–19वीं सदी की दो बस्तियों के कंकालों का विश्लेषण कर दिखाया कि औद्योगिक प्रदूषण सभी के लिए समान नहीं था। स्थानीय उद्योग, सामाजिक संदर्भ और पहचान ने जोखिम को आकार दिया।
वैज्ञानिकों ने COF और hBN मिलाकर एक नई सतह बनाई है जो प्रकाश का उपयोग कर पानी के कठिन प्रदूषकों को तोड़ती है। यह धातु-मुक्त, बार-बार उपयोगी और प्रयोगशाला स्थितियों में स्थिर पाई गई।
रियो के फ़्लैमेंगो बीच पर 2024 में एक अध्ययन से पता चला कि कार्निवल के दौरान रेत में ग्लिटर और अन्य माइक्रोप्लास्टिक बढ़ गए। शोध में नमूने, प्रदूषण के स्रोत और समुद्री प्रभावों पर बात की गई।
नए अध्ययन के अनुसार पेरू की जुनिन झील के जलक्षेत्र में आर्सेनिक, सीसा और अन्य विषाक्त धातु बहुत उच्च मात्रा में हैं। यह स्थानीय समुदायों और नीचे के पानी उपयोगकर्ताओं के लिए जोखिम पैदा करता है और आगे जांच की आवश्यकता है।
छोटे प्लास्टिक सैशेज बहुत बिकते हैं और कचरे का बड़ा स्रोत बन रहे हैं। सक्रिय समूहों ने दक्षिण-पूर्व एशिया में ऑडिट कर बहुत सारी ब्रांड वाली सैशेज जमा पाईं और कंपनियों से बदलाव की मांग की है।