छोटे प्लास्टिक सैशेज बहुत बिकते हैं और कचरे का बड़ा स्रोत बन रहे हैं। सक्रिय समूहों ने दक्षिण-पूर्व एशिया में ऑडिट कर बहुत सारी ब्रांड वाली सैशेज जमा पाईं और कंपनियों से बदलाव की मांग की है।
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